नकल माफिया–विभाग की साठगाठ उजागर: सीएम योगी के नकलविहीन परीक्षा संकल्प पर खतरा

शिक्षा विभाग की बड़ी खबर — कुशीनगर में मानक विहीन विद्यालयों को परीक्षा केन्द्र बनाने का गंभीर आरोप
कुशीनगर।
बोर्ड परीक्षा को नकलविहीन, पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से कराने की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा पर कुशीनगर जिले में पानी फेरने की तैयारी जोरों पर बताई जा रही है। शासन की गाइडलाइन और बोर्ड के कड़े मानकों को ताक पर रखकर कई विद्यालयों को कथित रूप से “मोटा पैसा लेकर” परीक्षा केन्द्र बनाए जाने का मामला तूल पकड़ता दिख रहा है।
सूत्रों के अनुसार 1.5 से 2 लाख रुपये तक की कथित डीलिंग कर डीआईओएस कार्यालय से मानकहीन विद्यालयों की “सजावटी रिपोर्ट” बोर्ड को भेजी गई है। इसमें सबसे बड़ा सवाल उन विद्यालयों पर उठ रहा है जिनमें न तो पर्याप्त कक्ष हैं और न ही बाउंड्रीवाल, फिर भी उन्हें परीक्षा सेंटर बना दिया गया है।
तुर्कडिहा के लक्ष्मी सिंह इंटर कॉलेज में तथ्य छुपाकर 29 कमरे दिखाए गए?
सूत्र बताते हैं कि हाटा तहसील क्षेत्र के तुर्कडिहा स्थित लक्ष्मी सिंह इंटरमीडिएट कॉलेज में वास्तविक रूप से 13 कमरे हैं, लेकिन डीआईओएस कार्यालय ने बोर्ड को 29 कक्षों का रिपोर्ट भेजकर विद्यालय को परीक्षा केंद्र बनवाया है। यह तथ्य सामने आने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
तितला का इंडियन पब्लिक इंटर कॉलेज—न कमरे, न बाउंड्रीवाल, फिर भी सेंटर!
इसी तहसील क्षेत्र के तितला स्थित इंडियन पब्लिक इंटर कॉलेज में न बोर्ड के निर्धारित कक्ष हैं और न परिसर की बाउंड्रीवाल। इसके बावजूद इसे केंद्र बनाए जाने की चर्चा है। सूत्रों का दावा है कि यहाँ भी कथित आर्थिक लेन-देन ने नियमों पर भारी पड़ गया।
कप्तानगंज क्षेत्र में भी मानकविहीन 8 विद्यालय परीक्षा केंद्र
कप्तानगंज तहसील क्षेत्र में उर्मिला देवी इंटर कॉलेज अहिरौली कुसम्हा समेत 8 वित्तविहीन विद्यालयों को परीक्षा केन्द्र बना दिया गया है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि इनमें से कई विद्यालय बोर्ड के न्यूनतम मानकों पर भी खरे नहीं उतरते।
हालाँकि उर्मिला देवी इंटर कॉलेज के प्रबंधक का कहना है कि—
“हमारा विद्यालय वर्ष 2017 से 2022 तक लगातार परीक्षा केंद्र रहा है। हर मानक को पूरा करता है। पिछले दो वर्षों में राजनीतिक दबाव के कारण सेंटर नहीं बना, लेकिन मानक में कोई कमी नहीं है।”
जनचर्चा: नकल माफिया–विभाग गठजोड़ सक्रिय?
जिले में यह चर्चा तेज है कि कुछ प्रभावशाली नकल माफिया और विभाग के कुछ जिम्मेदार मिलकर “सेंटर सेटिंग” का खेल रच रहे हैं। इससे न केवल योगी सरकार के नकलविहीन परीक्षा के संकल्प पर धब्बा लग रहा है, बल्कि शिक्षा की पूरी व्यवस्था अविश्वसनीय होती जा रही है।