समरसता, समानता और वैज्ञानिक सोच की रक्षा की अपील

कुशीनगर/पूर्वांचल, 22 नवम्बर 2025।
समाजसेवी और विचारक डॉ. सम्पूर्णानंद मल्ल, जिन्हें लोग पूर्वांचल गांधी के नाम से जानते हैं, ने देश की वर्तमान परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए माननीय राष्ट्रपति महोदया को एक विस्तृत पत्र भेजा है। पत्र में उन्होंने भारत के संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक सौहार्द और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की रक्षा के लिए तत्काल पहल करने की आवश्यकता बताई है।
डॉ. मल्ल ने पत्र में लिखा है कि भारत की शक्ति उसकी बहुलतावादी संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों में निहित है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र को आज सबसे अधिक जरूरत तिरंगे, संविधान, समानता और मानवता की है, न कि किसी प्रकार के धार्मिक उन्माद या वैचारिक वर्चस्व की।
“भगत सिंह का समाजवाद चाहिए, गोडसे का राष्ट्रवाद नहीं”
अपने पत्र में पूर्वांचल गांधी ने स्पष्ट शब्दों में लिखा—
- “हमें भगत सिंह का न्यायपूर्ण समाजवाद चाहिए, किसी प्रकार का सांप्रदायिक वर्चस्व नहीं।”
- “हमें गांधी का अहिंसा और स्वराज चाहिए, किसी भी फासीवादी प्रवृत्ति नहीं।”
- “हमें अंबेडकर का संविधान और सामाजिक न्याय चाहिए, किसी भी प्रकार की विषमता नहीं।”
- “हमें डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का विज्ञान चाहिए, अंधविश्वास और पाखंड नहीं।”
- “सबसे ऊपर मानवता चाहिए, नफ़रत नहीं।”
राष्ट्रपति महोदया से की ये अपील
पूर्वांचल गांधी ने राष्ट्रपति महोदया से अनुरोध किया है कि—
- संविधान की सर्वोच्चता को हर स्तर पर संरक्षित किया जाए।
- सामाजिक सौहार्द और सद्भाव को बनाए रखने के लिए कठोर कदम उठाए जाएँ।
- वैज्ञानिक सोच, शिक्षा व विवेक को प्रोत्साहित करने वाली नीतियाँ सुदृढ़ हों।
- सभी नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
“देश की आत्मा को बचाना हम सबका कर्तव्य है”
डॉ. मल्ल ने कहा कि भारत का भविष्य तभी सुरक्षित रहेगा जब देश एकता, बंधुत्व, समानता और लोकतांत्रिक परंपराओं पर गर्व करेगा। उन्होंने राष्ट्रपति महोदया से संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए मार्गदर्शन देने की अपील की।
SC के CJI और गृह मंत्री को भी भेजा पत्र
राष्ट्रपति महोदया के अलावा यह पत्र सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और भारत सरकार के गृह मंत्री को भी भेजा गया है।