मिश्रौली डोल मेले की सुरक्षा में कुशीनगर प्रशासन की कड़ी तैयारी

रिपोर्टर – विशेष संवाददाता
कुशीनगर। पूर्वी उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक व पारंपरिक मिश्रौली डोल मेला इस वर्ष प्रशासन की विशेष निगरानी में आयोजित हो रहा है। भीड़-भाड़ और संवेदनशील स्थिति को देखते हुए कुशीनगर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के ऐसे पुख़्ता इंतज़ाम किए हैं, जिनकी मिसाल जिले में कम ही देखने को मिलती है।

संवेदनशील गाँव, बड़ी चुनौती
मिश्रौली गाँव लंबे समय से प्रशासन की दृष्टि में संवेदनशील माना जाता रहा है। यहाँ होने वाला डोल मेला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्व रखता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और आगंतुक इस मेले में शामिल होते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था बनाए रखना हमेशा एक बड़ी चुनौती रहा है।

वरिष्ठ अधिकारियों की सीधी निगरानी
दिनांक 17 अगस्त 2025 को पुलिस अधीक्षक कुशीनगर श्री संतोष कुमार मिश्रा के निर्देशन में अपर पुलिस अधीक्षक श्री निवेश कटियार और क्षेत्राधिकारी सदर श्री अजय कुमार सिंह ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षा-व्यवस्था का जायज़ा लिया। उन्होंने मेला क्षेत्र में तैनात पुलिसकर्मियों के साथ ब्रीफिंग सत्र आयोजित कर शांति और सतर्कता बनाए रखने के स्पष्ट निर्देश दिए।
एएसपी महोदय ने कहा कि “मेले में आने वाले श्रद्धालुओं और आगंतुकों की सुविधा व सुरक्षा सर्वोपरि है। पुलिसकर्मी किसी भी स्थिति में ढिलाई न बरतें और पूर्ण तत्परता से ड्यूटी निभाएँ।”
भीड़ और ट्रैफिक प्रबंधन पर विशेष ज़ोर
अधिकारियों ने पुलिस बल को भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने का निर्देश दिया। साथ ही आपात स्थिति से निपटने की योजनाओं पर भी विस्तृत चर्चा हुई। मेले के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए पैदल गश्त और महिला पुलिस बल की तैनाती भी सुनिश्चित की गई है।
भारी सुरक्षा बल की तैनाती
डोल मेले की सुरक्षा व्यवस्था के लिए कुशीनगर पुलिस ने विभिन्न थानों से फोर्स बुलाकर भारी पुलिस बल लगाया है। इसमें शामिल हैं –

- 13 प्रभारी निरीक्षक/थानाध्यक्ष
- 12 निरीक्षक
- 60 उपनिरीक्षक
- 7 महिला उपनिरीक्षक
- 250 मुख्य आरक्षी/आरक्षी
- 55 महिला कांस्टेबल
- पीएसी की एक कम्पनी और एक प्लाटून
- 2 फायर टेंडर
- 1 ट्रैफिक इंस्पेक्टर तथा 25 ट्रैफिक कर्मचारी
पिछले वर्षों की सीख, इस बार की सावधानी
गौरतलब है कि पूर्व में ऐसे मेलों के दौरान अव्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और विवाद की घटनाएँ सामने आती रही हैं। इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस बार प्रशासन ने पहले से ही व्यापक तैयारी की है। सुरक्षा बलों की तैनाती, ट्रैफिक व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं को लेकर विशेष योजना बनाई गई है।
निष्कर्ष
मिश्रौली डोल मेला केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द का भी द्योतक है। इस आयोजन को सकुशल सम्पन्न कराने के लिए कुशीनगर प्रशासन पूरी तरह सतर्क और सक्रिय है। भारी सुरक्षा बंदोबस्त और अधिकारियों की सीधी निगरानी इस बात का सबूत है कि प्रशासन इस मेले को हर हाल में शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाना चाहता है।
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