इंटरमीडिएट विद्यालयों में प्रबंध कमेटियों द्वारा की गई नियुक्तियां जांच के घेरे में

शिक्षा बिभाग उत्तर प्रदेश

फर्जी दस्तावेजों के सहारे चहेतों की भर्ती, 90% नियुक्तियों पर उठे सवाल

रिपोर्ट: के.एन. साहनी | सच्ची रिपोर्ट, उत्तर प्रदेश

कुशीनगर। शिक्षा के मंदिरों में जब रिश्वत, सिफारिश और फर्जीवाड़ा अपना अड्डा बना लें, तो छात्रों का भविष्य भी संदेह के घेरे में आ जाता है। इंटरमीडिएट विद्यालयों में प्रबंध कमेटियों द्वारा की गई नियुक्तियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, लगभग 90 प्रतिशत नियुक्तियां फर्जी दस्तावेजों के आधार पर की गई हैं, और यह पूरा मामला जांच का विषय बना हुआ है।

प्रबंध कमेटियों ने बनाया भर्ती को धंधा

सरकार द्वारा रिक्त पदों की नियुक्ति आमतौर पर लोक सेवा आयोग या चयन बोर्ड के माध्यम से पारदर्शी प्रक्रिया से होती है, जिसमें चयन के लिए परीक्षाएं, साक्षात्कार एवं अन्य मापदंड शामिल होते हैं। लेकिन दूसरी ओर, विद्यालयों की प्रबंध कमेटियों ने अपनी मनमानी से चहेते लोगों को बिना प्रक्रिया के ही नियुक्त कर दिया, जिससे योग्य अभ्यर्थी बाहर रह गए और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला।

सूत्रों का खुलासा और दस्तावेजों की हकीकत

नाम न छापने की शर्त पर सूत्रों ने बताया कि “यदि विद्यालयों में नियुक्त किए गए अध्यापकों के शैक्षणिक और प्रशिक्षण दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जाए, तो कई डिग्रियां फर्जी पाई जाएंगी। लेकिन यह मामला ऐसा है, जिसमें **’बिल्ली के गले में घंटी बांधने वाला’ कोई नहीं।”

जांचें हुईं, कुछ पर कार्रवाई भी — पर मुकदमे अब भी लंबित

पिछले वर्षों में प्राप्त शिकायतों के आधार पर शिक्षा विभाग ने कुछ मामलों में जांच कर कार्यवाही भी की थी। कई फर्जी नियुक्तियों पर प्राथमिकी दर्ज हुई, और कुछ लोगों के निलंबन व सेवा समाप्ति की कार्रवाई भी की गई। हालांकि, अधिकांश मामलों में मुकदमे आज भी लंबित हैं और न्याय प्रक्रिया की धीमी रफ्तार से शिकायतकर्ता हतोत्साहित हैं।

अब सवाल यह — आखिर जांच पूरी कौन करेगा?

क्या सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेगी और प्रदेश भर के इंटर कॉलेजों में की गई सभी नियुक्तियों की दस्तावेजी जांच कराएगी? या फिर यह मामला भी अन्य भ्रष्टाचार प्रकरणों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?

शिक्षा विभाग, प्रशासन और शासन की निष्क्रियता ने अब इस सवाल को जन्म दिया है कि – “जब भ्रष्टाचार खुलेआम हो रहा है, तो जांच की घंटी कौन बजाएगा?”


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