कुशीनगर में शिक्षा के नाम पर मज़ाक!
धन की ठंडक में घुल रही जांच, बिना मान्यता के धड़ल्ले से चल रहे स्कूल


रिपोर्ट: के.एन. साहनी, कुशीनगर
शिक्षा के नाम पर कुशीनगर में जो खेल चल रहा है, वह किसी साजिश से कम नहीं है। जगह-जगह बिना मान्यता के विद्यालय खुलकर बच्चों का भविष्य अंधेरे में धकेल रहे हैं। बोर्ड चमचमाते हैं, लेकिन मान्यता कागज़ पर नहीं। सवाल ये है कि जब सब कुछ शिक्षा विभाग को मालूम है — स्कूल कहां है, कौन चला रहा है, कितने बच्चे पढ़ रहे हैं — तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं?
कहते हैं “जांच की आंच बड़े-बड़े घोटालों को बेनकाब करती है”, लेकिन कुशीनगर में धन की एसी की ठंडक ने न सिर्फ आंच को बुझा दिया है, बल्कि भ्रष्टाचार की जड़ों को और मजबूत कर दिया है। शिक्षा विभाग अब जुर्म को रोकने वाला नहीं, जुर्म को निगलने वाला बन गया है।
भंडाफोड़ के बाद भी मौन – क्यों?
बिना मान्यता के चल रहे स्कूलों की सूची शिक्षा विभाग के पास वर्षों से मौजूद है।
कई बार शिकायतें हुईं, निरीक्षण भी हुआ, लेकिन कार्रवाई नहीं। उल्टे स्कूल और फलते-फूलते गए। क्या इन स्कूलों को किसी का संरक्षण प्राप्त है?
या फिर हर महीने की मौन धनवर्षा ने सबकी आंखें मूंद दी हैं?
अभिभावक परेशान, अधिकारी बेपरवाह
जहां एक ओर अभिभावक महंगी फीस देकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं, वहीं ये स्कूल मानक तक पूरे नहीं करते – न भवन सही, न शिक्षक प्रशिक्षित, न खेल-कूद की सुविधा और न ही सुरक्षा मानक।
जिम्मेदारी किसकी? क्या इन बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ का ठेका भी अब ‘घूस’ से तय होगा?
अब जनता बोलेगी!
अब समय आ गया है कि जनता सवाल करे —
- कब होगी इन अवैध स्कूलों पर कार्रवाई?
- कब तक शिक्षा विभाग की चुप्पी चलेगी?
- कब तक बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ होता रहेगा?
अगर शासन-प्रशासन ईमानदारी से कार्रवाई करे, तो एक सप्ताह में ही जिले के दर्जनों फर्जी स्कूल बंद हो सकते हैं। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि जांच सिर्फ फाइलों में न हो, कार्रवाई जमीन पर दिखे।
जनहित में सवाल –
क्या आपके क्षेत्र में भी बिना मान्यता का स्कूल चल रहा है? तो आवाज उठाइए।
शिक्षा को व्यापार बनने से रोकना अब हमारी जिम्मेदारी है।