


रिपोर्ट: के. एन. सहानी, सच्ची रिपोर्ट, कुशीनगर
कुशीनगर। जिले में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। लेकिन जब अभिभावक अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में दाखिला दिलाने जाते हैं, तो सबसे पहले आधार कार्ड की अनिवार्यता सामने आती है। चार से पांच वर्ष के छोटे बच्चों का आधार कार्ड बनवाना आसान नहीं रह गया है। माता-पिता, खासकर महिलाएं, महीनों से आधार केंद्रों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन समय पर काम नहीं हो पा रहा।
गांवों से आने वाली महिलाओं को गर्मी, भीड़ और अव्यवस्था के बीच लंबी कतारों में लगना पड़ता है। कभी सिस्टम खराब, कभी ऑपरेटर नदारद, तो कभी कागजी प्रक्रियाओं की भरमार – हर दिन नई परेशानी। स्कूलों की अंतिम तिथि पास आती जा रही है, लेकिन बच्चों का आधार नहीं बन पाने से दाखिले में रुकावट आ रही है।
एक महिला ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा,
“जनता दुखी रही तो सरकार को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।”
वर्तमान में बैंकों, राशन कार्ड के केवाईसी, आंगनबाड़ी केंद्रों से लेकर आधार सुधार केंद्रों तक भीड़ बढ़ती जा रही है, परंतु बच्चों के लिए समुचित आधार पंजीकरण व्यवस्था नहीं है।
समाधान क्या है?
- जिलाधिकारी कुशीनगर से मांग की जा रही है कि सभी ब्लॉकों और पंचायतों में आधार पंजीकरण के लिए विशेष शिविर लगाए जाएं।
- महिलाओं और बच्चों के लिए प्राथमिकता काउंटर बनाकर उन्हें राहत दी जाए।
- इसके साथ ही, आधार से जुड़ी किसी भी जानकारी या सुझाव के लिए नागरिक UIDAI की हेल्पलाइन नंबर 1947 पर कॉल करके सहायता प्राप्त कर सकते हैं।