पूर्वांचल गांधी का सत्याग्रह:डॉ. संपूर्णानंद मल्ल 15 जुलाई से गोरखपुर विश्वविद्यालय गेट पर तिरंगे के साथ करेंगे अनशन।


पूर्वांचल गांधी का सत्याग्रह:
डॉ. संपूर्णानंद मल्ल 15 जुलाई से गोरखपुर विश्वविद्यालय गेट पर तिरंगे के साथ करेंगे अनशन।

डाo संपूर्णनानंद मल्ल

🟨 योग्यता पर सवाल और उपेक्षा का आरोप:
दिल्ली विश्वविद्यालय से पीएच.डी, UGC-NET उत्तीर्ण मल्ल बोले— “मेरी तुलना में कम योग्य लोग विश्वविद्यालय में नियुक्त”

🟩 न्याय न मिला तो होगा आमरण अनशन:
“जीवन, जीविका और सम्मान की पुनरप्राप्ति के लिए सत्याग्रह मेरा अंतिम रास्ता” – डॉ. संपूर्णानंद मल्ल


विश्वविद्यालय गेट पर 15 जुलाई से अनशन पर बैठेंगे ‘पूर्वांचल गांधी’
रिपोर्ट: के. एन. साहनी, गोरखपुर

गोरखपुर।
“लिखते-लिखते थक चुका हूँ…” — यह पीड़ा दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग से पीएच.डी कर चुके डॉ. संपूर्णानंद मल्ल की है, जिन्हें लोग ‘पूर्वांचल का गांधी’ कहकर संबोधित करते हैं। डॉ. मल्ल ने घोषणा की है कि वे 15 जुलाई से दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर तिरंगे के साथ अनशन पर बैठेंगे।

डॉ. मल्ल का आरोप है कि वे पीजी में प्रथम श्रेणी, UGC-NET पास और दिल्ली विश्वविद्यालय से शोध उपाधि प्राप्त होने के बावजूद भी विश्वविद्यालय उन्हें “योग्य” नहीं मानता। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर इशारा करते हुए कहा कि यहाँ कई ऐसे शिक्षक कार्यरत हैं जिनकी न शैक्षणिक योग्यता और न ही शोध गुणवत्ता उनके बराबर की है, फिर भी उन्हें दरकिनार किया जा रहा है।

उनके शब्दों में—

“मुझे महामहिम राज्यपाल और राष्ट्रपति तक अयोग्य नहीं ठहरा सकते, तो फिर यह विश्वविद्यालय क्यों मेरी उपेक्षा कर रहा है?”

डॉ. मल्ल ने मांग की है कि यूजीसी के 28 अगस्त 2008 के दिशा-निर्देशों को लागू कर उन्हें 30 अगस्त 2003 से (मानदेय तिथि) वरिष्ठता के आधार पर प्रोफेसर पद पर नियुक्त किया जाए। वे इस विषय पर कई बार प्रशासन से संवाद कर चुके हैं, परंतु उन्हें केवल आश्वासन मिला है, न्याय नहीं।

इस मुद्दे को लेकर डॉ. मल्ल ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, यूजीसी अध्यक्ष, मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और एसएसपी को प्रतिलिपि भेजते हुए अपनी बात रखी है।

उनका कहना है:

“मैं कोई विद्रोह नहीं कर रहा, केवल सत्य का मार्ग अपना रहा हूँ। विश्वविद्यालय को न्यायपूर्ण निर्णय लेना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो मैं ‘जीवन, जीविका और सम्मान’ की पुनरप्राप्ति हेतु आमरण अनशन करूंगा।”

गौरतलब है कि डॉ. मल्ल पूर्व में भी शिक्षा, नैतिकता और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर कई बार आवाज़ उठा चुके हैं। इस बार उनका सत्याग्रह नियुक्ति की मांग के साथ विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल भी खड़ा कर रहा है।


रिपोर्ट: के. एन. साहनी
स्थान: शांतिवन शोध पुस्तकालय, गोरखपुर
प्रकाशन: सच्ची रिपोर्ट, उत्तर प्रदेश

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