भीषण गर्मी बनी रोग की जननी, वायरल फीवर के साथ उल्टी-दस्त का कहरशिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. वी. के. सिंह ने दी सतर्कता बरतने की सलाह

रिपोर्ट: के. एन. सहानी, कुशीनगर

कुशीनगर।
जिले में इन दिनों भीषण गर्मी और उमस ने न सिर्फ आमजन का जीवन कठिन कर दिया है, बल्कि अब यह स्वास्थ्य संकट का कारण भी बनती जा रही है। विशेष रूप से छोटे बच्चों में वायरल फीवर, उल्टी और दस्त जैसे लक्षण तेजी से बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे गर्मी के मौसम और बरसात के शुरुआती संक्रमण से जुड़ा मान रहे हैं।

बच्चों में बढ़ रहे हैं उल्टी, बुखार व दस्त के मामले
जिले के प्रमुख चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. वी. के. सिंह, जो सरस्वती चाइल्ड हॉस्पिटल के डॉक्टर भी हैं, ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में अस्पताल में बुखार, उल्टी और दस्त से पीड़ित बच्चों की संख्या में अचानक बढ़ोत्तरी हुई है। उन्होंने कहा, “बरसात के मौसम में संक्रामक रोग तेजी से फैलते हैं। गर्मी और नमी के कारण बैक्टीरिया और वायरस अधिक सक्रिय हो जाते हैं, जिससे शिशुओं में संक्रमण की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।”

लक्षणों को न करें नजरअंदाज, समय पर लें चिकित्सा सहायता
डॉ. वी.के. सिंह ने बताया कि बुखार के साथ ठंड लगना, लगातार उल्टी आना, पतला दस्त और अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखें तो लापरवाही न करें। ऐसे में तुरंत किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श लें। उन्होंने यह भी सलाह दी कि “ओ.आर.एस. का घोल बच्चों को दें, ताकि शरीर में पानी और नमक की कमी पूरी हो सके।”

जनता से अपील: साफ-सफाई रखें, मच्छरों से बचाव करें
डॉ. वी. के. सिंह ने नागरिकों से अपील की कि गर्मी और बारिश के इस संक्रमण काल में विशेष सतर्कता बरतें। बच्चों को साफ पानी पिलाएं, खुले में रखे खाद्य पदार्थ न दें और मच्छरों से बचाव के सभी उपाय अपनाएं।
उन्होंने कहा, “घर में नमक-चीनी का घोल बनाकर पीलाये रखें, बुखार या दस्त के पहले लक्षण पर ही ORS देना शुरू करें और यदि 24 घंटे में सुधार न हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।”

अस्पतालों में बढ़ती भीड़, प्रशासन को भी सतर्कता जरूरी
स्थानीय अस्पतालों में मरीजों की भीड़ से स्थिति गंभीर होती जा रही है। जनपद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा शिविर लगाए जाएँ और जागरूकता अभियान चलाकर आम जनता को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

रिपोर्ट: के. एन. सहानी, कुशीनगर

“बच्चों को इन रोगों से कैसे बचाएं?”

उबला या शुद्ध पानी पिलाएं

ORS या नमक-चीनी का घोल घर में रखें

खुले खाने से परहेज करें

मच्छरदानी या मॉस्किटो रिपेलेंट का प्रयोग करें

बच्चों के हाथ-पाँव बार-बार धुले।

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