
बौद्ध पर्यटन की विश्वस्तरीय पहचान रखने वाला कुशीनगर आज एक गंभीर विडंबना का सामना कर रहा है। जिस कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को क्षेत्र के विकास, पर्यटन और रोजगार का नया द्वार बताया गया था, आज वही एयरपोर्ट अपनी उपेक्षा और सीमित संचालन के कारण सवालों के घेरे में है।
समाजसेवी शिव दयाल ने कहा कि कुशीनगर की जनता ने वर्षों तक इस एयरपोर्ट के निर्माण का सपना देखा था, ताकि क्षेत्र के युवाओं को रोजगार मिले, व्यापार को बढ़ावा मिले और बौद्ध पर्यटन को नई पहचान मिले। लेकिन आज स्थिति यह है कि एयरपोर्ट का उपयोग सीमित रह गया है और स्थानीय जनता को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इस महत्वपूर्ण परियोजना की उपेक्षा के लिए जिम्मेदार कौन है? सरकार इस विषय पर चुप क्यों है? जिस एयरपोर्ट को जनता के विकास और क्षेत्रीय प्रगति का प्रतीक होना चाहिए था, वह आज केवल औपचारिकता बनकर रह गया है।
शिव दयाल ने कहा कि कुशीनगर एयरपोर्ट का नियमित और प्रभावी संचालन कोई राजनीतिक मांग नहीं, बल्कि जनमानस की संवैधानिक और लोकतांत्रिक मांग है। क्षेत्र की जनता यह जानना चाहती है कि इस एयरपोर्ट से स्थानीय लोगों को रोजगार, व्यापार और आवागमन की वास्तविक सुविधाएं कब मिलेंगी।
उन्होंने सरकार से मांग की कि कुशीनगर एयरपोर्ट की उपेक्षा तत्काल समाप्त की जाए, नियमित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की व्यवस्था की जाए तथा इसे क्षेत्रीय विकास का वास्तविक केंद्र बनाया जाए। साथ ही एयरपोर्ट के पूर्ण और प्रभावी शुभारम्भ के लिए ठोस और समयबद्ध कदम उठाए जाएं।
यदि शीघ्र ही इस दिशा में सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो जनता इस मुद्दे को लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से मजबूती के साथ उठाने के लिए बाध्य होगी।