अगर हर तहसील में ऐसे एसडीएम हों तो फरियादियों को दर-दर नहीं भटकना पड़े…”

अगर हर तहसील में ऐसे एसडीएम हों तो फरियादियों को दर-दर नहीं भटकना पड़े…”

जनपद कुशीनगर की तमकुहीराज तहसील में प्रशासनिक संवेदनशीलता और त्वरित न्याय का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है। यहां तैनात एसडीएम डॉ. संतराज सिंह ने एक पीड़ित महिला की शिकायत पर जिस गंभीरता और तत्परता से संज्ञान लिया, उससे आमजन में प्रशासन के प्रति भरोसा और मजबूत हुआ है।

थाने से नहीं मिला समाधान, तहसील पहुंची पीड़िता
थाना तुर्कपट्टी क्षेत्र के ग्राम सपहा निवासी एक महिला लगातार थाने का चक्कर लगा रही थी। फरियादी सूत्रों के अनुसार, मामला थाना स्तर पर ही निस्तारित हो सकता था, लेकिन कार्रवाई लंबित होने से पीड़िता मानसिक और सामाजिक रूप से परेशान थी।
आखिरकार न्याय की उम्मीद लेकर वह एसडीएम कार्यालय पहुंची। जैसे ही मामला एसडीएम डॉ. संतराज सिंह के संज्ञान में आया, उन्होंने बिना देरी किए संबंधित थानाध्यक्ष को कड़े निर्देश दिए।
“पीड़िता की सुरक्षा सर्वोपरि”
एसडीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी महिला के साथ मारपीट या उत्पीड़न की घटना अत्यंत गंभीर है और ऐसे मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देशित किया कि पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और प्रकरण में त्वरित एवं निष्पक्ष कार्रवाई हो।
प्रशासन पर बढ़ा भरोसा
एसडीएम के हस्तक्षेप के बाद पीड़िता को तत्काल राहत मिली। स्थानीय लोगों और फरियादियों का कहना है कि यदि हर तहसील में अधिकारी इसी तरह सक्रिय और संवेदनशील रहें, तो आमजन को न्याय के लिए भटकना नहीं पड़े।
जनता के बीच यह चर्चा है कि डॉ. संतराज सिंह जैसे अधिकारी प्रशासन की साख को मजबूत करते हैं। उनका मानना है कि जब अधिकारी स्वयं पीड़ित की बात सुनकर तत्काल निर्णय लेते हैं, तो व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही स्वतः बढ़ जाती है।

यह घटना न सिर्फ एक महिला को राहत देने का मामला है, बल्कि यह संदेश भी है कि प्रशासन यदि इच्छाशक्ति दिखाए तो न्याय दूर नहीं।

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