भतीजी से दुष्कर्म करने वाले कलयुगी चाचा को 25 वर्ष का कठोर कारावास

भतीजी से दुष्कर्म करने वाले कलयुगी चाचा को 25 वर्ष का कठोर कारावास

पॉक्सो कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, 3.10 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया

कुशीनगर।

विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट/अपर सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार की अदालत ने एक हृदयविदारक और समाज को झकझोर देने वाले मामले में कड़ा व ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने नाबालिग भतीजी से दुष्कर्म के दोषी उसके सगे चाचा हिरदेश कुमार को दोषसिद्ध पाते हुए 25 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 3,10,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
क्या था पूरा मामला
अभियोजन के अनुसार, 22 नवंबर 2020 को अहिरौली बाजार थाना क्षेत्र के एक गांव में अभियुक्त हिरदेश कुमार ने अपनी सगी भतीजी को घर में अकेला पाकर उसके साथ जबरन बलात्कार किया। इस जघन्य कृत्य के परिणामस्वरूप पीड़िता गर्भवती हो गई। चिकित्सकीय एवं वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई कि पीड़िता 24 सप्ताह की जुड़वा गर्भावस्था से पीड़ित थी।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए अभियुक्त को मौके से गिरफ्तार कर लिया था और मामले की विवेचना पूर्ण कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
न्यायालय की कड़ी और भावुक टिप्पणी
फैसला सुनाते समय न्यायाधीश दिनेश कुमार ने अत्यंत कठोर शब्दों में टिप्पणी करते हुए कहा—
“बलात्कार स्वयं में महिला के सम्मान पर सबसे बड़ा आघात है। स्त्री ईश्वर की उत्कृष्ट रचना है, जिसमें ममता और शक्ति दोनों का समावेश होता है। लेकिन इस प्रकरण में पीड़िता का सगा चाचा ही उसका शोषण कर उसे अविवाहिता अवस्था में जुड़वा बच्चों की मां बनने के लिए विवश कर देता है। यह कृत्य अत्यंत जघन्य और अमानवीय अपराध की श्रेणी में आता है।”
जुर्माने की पूरी राशि पीड़िता को
न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि अभियुक्त से वसूली गई 3 लाख 10 हजार रुपये की संपूर्ण धनराशि पीड़िता को चिकित्सा उपचार और पुनर्वास के लिए प्रदान की जाएगी, जिससे उसका भविष्य सुरक्षित किया जा सके।
अभियोजन की प्रभावी पैरवी
शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो एक्ट) श्री फूलबदन एवं श्री अजय गुप्ता ने प्रभावी और सशक्त पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में कुल 10 साक्षियों का परीक्षण कराया, जिनके ठोस बयानों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने अभियुक्त को दोषी ठहराया।
समाज को सख्त संदेश
न्यायालय ने अपने आदेश की प्रति समाचार पत्रों को भेजने का निर्देश दिया है, ताकि समाज में यह स्पष्ट संदेश जाए कि नाबालिगों और महिलाओं के विरुद्ध अपराध करने वालों को कानून किसी भी हाल में बख्शेगा नहीं, और ऐसे घृणित कृत्यों का परिणाम कठोर सजा के रूप में सामने आएगा।

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