
रामकोला चीनी मिल उगल रही काली राख — नगरवासी परेशान, प्रशासन से कार्रवाई की मांग तेज
रामकोला, कुशीनगर। सर्दी के इस मौसम में रामकोला चीनी मिल से निकलने वाली काली राख ने नगरवासियों का दिन-रात का चैन छीन लिया है। मिल की चिमनी से लगातार उड़ती राख क्षेत्र में इस कदर फैल रही है कि घर से बाहर निकलना, कपड़े सुखाना, छत पर जाना, पानी भरना और यहां तक कि खाना-पीना भी मुश्किल हो गया है।
लोगों का कहना है कि हवा में मौजूद राख इतनी बारीक है कि सांस के साथ यह सीधे मुँह और फेफड़ों में जा रही है। स्थानीय डॉक्टर भी सावधान कर चुके हैं कि लंबे समय तक इस राख का संपर्क अस्थमा, एलर्जी, फेफड़ों में इंफेक्शन और आंखों की जलन जैसी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है।
राख की वजह से पूरी बस्ती काली — छतें, सड़कें और दीवारें ढकीं
राहगीरों के कपड़ों पर काला पाउडर जम जाता है। खुले में रखी वस्तुएं मिनटों में राख से भर जाती हैं। स्कूल जाने वाले बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। क्षेत्र के कई मोहल्लों में लोग सुबह उठते ही सबसे पहले छतों और आंगन की सफाई करने पर मजबूर हैं।
“पानी भी पीना मुश्किल, राख गिर रही है”— स्थानीय लोग
निवासियों का कहना है कि पीने के पानी तक में राख गिर रही है। जलभराव वाले बर्तनों में काले कण स्पष्ट दिखाई देते हैं। लोग रोजाना घरों में कई बार झाड़ू-पोंछा करने के बावजूद राहत नहीं पा रहे हैं।
एक गृहिणी का कहना है—
“कपड़े सुखाना असंभव हो गया है, साफ कपड़े भी राख से गंदे हो जाते हैं। खाना बनाते समय तक राख उड़कर बर्तनों में जा रही है।”
शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं, बढ़ रहा आक्रोश
स्थानीय नागरिकों ने कई बार मिल प्रशासन और जिला अधिकारियों को शिकायत दी, लेकिन उड़ती राख रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लोगों का कहना है कि यदि स्थिति यही रही तो वे धरना और प्रदर्शन करने को मजबूर हो जाएंगे।
मांग — आधुनिक फिल्टर प्लांट लगे, राख निस्तारण व्यवस्था सुधारी जाए
नागरिकों ने चीनी मिल प्रबंधन से मांग की है कि चिमनी पर आधुनिक इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रीसिपिटेटर (ESP) लगाकर राख को नियंत्रित किया जाए, और कोयला या बगास के उपयोग में मानक अपनाए जाएं।
उन्होंने जिला प्रशासन से आग्रह किया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम भेजकर निरीक्षण कराया जाए और समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए।
रिपोर्ट : के. एन. साहनी