कसया के लोगों की मन की चिंता बढ़ी: होटल–गेस्ट हाउसों की भरमार से बढ़ी सामाजिक अव्यवस्था, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर खतरा


कसया के लोगों की मन की चिंता बढ़ी: होटल–गेस्ट हाउसों की भरमार से बढ़ी सामाजिक अव्यवस्था, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर खतरा

कसया में होटल–गेस्ट हाउसों की बाढ़ से बिगड़ा माहौल, महिलाएँ डरीं–सहमीं

शिक्षा और शांति की धरती अब बदलती छवि से चिंतित, युवाओं का भविष्य दांव पर

कार्रवाई के बाद भी क्यों नहीं रुकता अवैध धंधा? प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल


कुशीनगर/कसया। एक समय था जब कसया और कुशीनगर शांति, आध्यात्म और ज्ञान की धरती के रूप में जाने जाते थे। दूर देशों से पर्यटक तथागत भगवान बुद्ध के दर्शन और प्रसिद्ध माथाकुंवर मेले का आनंद लेने आते थे। शिक्षा का मजबूत वातावरण था और बुद्ध पीजी कॉलेज, बुद्ध इंटर कॉलेज सहित कई संस्थानों ने युवाओं के भविष्य को उजाला दिया।

लेकिन आज कसया नगर और उसके आसपास का माहौल तेजी से बदल रहा है। होटल, लॉज और गेस्ट हाउसों की अनियंत्रित बढ़ोतरी ने स्थानीय समाज के बीच गहरी चिंता उत्पन्न कर दी है। पिछले कुछ वर्षों में खुले इन प्रतिष्ठानों की संख्या ने क्षेत्र के सामाजिक संतुलन को हिला दिया है।


महिलाओं में बढ़ी असुरक्षा — मनचलों की हरकतों से परेशानी

स्थानीय मोहल्ले की एक महिला (नाम न प्रकाशित) कहती हैं—
“हमारी बेटियाँ जब स्कूल जाती हैं तो मनचलों की निगाहें उन पर रहती हैं। गेस्ट हाउसों के आसपास पहले जैसी सुरक्षा नहीं है। डर बना रहता है कि कब कौन पीछा करने लगे।”

एक अन्य गृहिणी ने बताया—
“शाम होते ही कई जगहों पर अजीब भीड़ और संदिग्ध गतिविधियाँ दिखती हैं, जिससे महिलाएँ घर से बाहर निकलने में भी डरती हैं।”


युवाओं का भविष्य खतरे में, अभिभावक गंभीर रूप से चिंतित

कसया के एक अभिभावक ने कहा—
“स्कूल और गेस्ट हाउस एक ही लाइन में चल रहे हैं। बच्चे रोज़ वही सब देखते हैं। ऐसा वातावरण उनके मन और सोच को बिगाड़ सकता है। स्थिति पहले कभी इतनी खराब नहीं थी।”


प्रशासन पर सवाल — कार्रवाई के बाद भी क्यों चालू हो जाते हैं गेस्ट हाउस?

स्थानीय व्यापारी राहुल श्रीवास्तव ने बताया—
“कई गेस्ट हाउसों पर नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई हुई, लेकिन कुछ ही दिनों बाद फिर वही धंधा चालू हो जाता है। बिना संरक्षण के इतना संभव ही नहीं है।”


पुलिस प्रशासन का बयान

थाना कसया के एक प्रभारी अधिकारी (नाम न प्रकाशित) ने कहा—
“हम लगातार जाँच कर रहे हैं। नियमों का पालन न करने वाले प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई हुई है और आगे भी होगी। अवैध देह व्यापार जैसी गतिविधियों को किसी भी हाल में नहीं चलने दिया जाएगा।”

हालाँकि, स्थानीय जनता इस बयान को पर्याप्त नहीं मानती और कहती है—
“अब कागज़ी नहीं, जमीन पर सख्ती चाहिए।”


नगर पंचायत प्रतिनिधि का बयान

नगर पंचायत क्षेत्र के एक वार्ड सदस्य ने कहा—
“स्कूलों, घरों और बाजारों के बीच गेस्ट हाउस खोलना बिल्कुल गलत है। अगली नगर पंचायत बैठक में प्रस्ताव लाया जाएगा कि ऐसे प्रतिष्ठानों को संवेदनशील इलाकों से हटाया जाए।”


जनता की एक स्वर में मांग

स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से नीचे की मांगें की हैं—

  • सभी होटल–गेस्ट हाउसों की कठोर जाँच
  • नियमविरुद्ध चल रहे प्रतिष्ठानों की स्थायी सीलिंग
  • संवेदनशील इलाकों में होटल संचालन पर प्रतिबंध
  • महिलाओं की सुरक्षा के लिए रात्रि पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए
  • संदिग्ध गतिविधियों पर डे-टू-डे मॉनिटरिंग के लिए विशेष टास्क फोर्स बनाई जाए

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