पीड़िया :आस्था,शुचिता और संयम ही जीवन को सुंदर बनाता हैं:केoएनoसाहनी

पीड़िया व्रत और गंगा स्नान : पवित्रता, संस्कार और आस्था का अद्भुत समन्वय

हिंदू धर्म की विशेषता यह है कि यहाँ प्रत्येक व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को शुचिता, अनुशासन और आध्यात्मिकता से जोड़ने का माध्यम होता है। इन्हीं परंपराओं में से एक है पीड़िया व्रत, जिसे आज के शुभ दिन पर अविवाहित कन्याएँ पूरे श्रद्धा और आस्था के साथ करती हैं। इस व्रत की शुरुआत प्रातःकाल गंगा स्नान से होती है, और यही स्नान इस व्रत को आध्यात्मिक रूप से पूर्ण बनाता है।

गंगा स्नान को भारतीय संस्कृति में शुद्धि का प्रथम चरण माना गया है। प्रातःकाल गंगा जल में डुबकी लगाकर व्रत की शुरुआत करना केवल धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा की पवित्रता का संदेश है। मान्यता है कि गंगा जल का स्पर्श मन की नकारात्मकता को मिटाकर साधक को नवीन शक्ति प्रदान करता है। व्रत रखने वाली कन्याएँ इसी निर्मलता के साथ दिन भर अपने व्रत का पालन करती हैं।

गंगा और पार्वती दोनों ही शिव भक्ति की प्रतीक हैं, इसलिए गंगा स्नान के बाद किया गया पीड़िया व्रत माता गौरी और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है। कन्याएँ अपने भविष्य के सुयोग्य, सदाचारी और सौभाग्यशाली जीवनसाथी की कामना इसी पवित्र भाव से करती हैं। जिस प्रकार गंगा अविरल बहती हैं, उसी प्रकार उनके जीवन में भी सौभाग्य, समृद्धि और सुख का निरंतर प्रवाह बना रहे—यह इस व्रत की मुख्य प्रार्थना है।

गंगा स्नान केवल आध्यात्मिक कारणों से ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी है। गंगा जल में रोगाणुनाशक गुण पाए जाते हैं, जो स्नान के समय शरीर को प्राकृतिक ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसीलिए प्राचीन ऋषियों ने इसे जीवनदायिनी कहा।

सुबह का स्नान, तप, संयम और ध्यान—ये सभी तत्व मिलकर पीड़िया व्रत को केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि नैतिक अनुशासन और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक बनाते हैं। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में जब भावनात्मक और मानसिक स्थिरता दुर्लभ हो रही है, ऐसे समय में इस प्रकार की परंपराएँ मनुष्य को अपनी जड़ों, संस्कारों और विश्वासों से जोड़ती हैं।

आज भी जब कन्याएँ प्रातः गंगा तट पर स्नान कर व्रत का संकल्प लेती हैं, तो यह दृश्य केवल धार्मिक नहीं—बल्कि भारतीय संस्कृति के जीवित रहने की गवाही भी है। पीड़िया व्रत अपनी पवित्रता और सौभाग्य की कामनाओं के साथ आने वाली पीढ़ियों को यही संदेश देता है कि—
“आस्था, शुचिता और संयम ही जीवन को सुंदर बनाते हैं।”

संपादकीय :के एन साहनी कुशीनगर 9453013386

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