खाद की किल्लत ने बिगाड़ी किसानों की नींद,रात में उठान, दिन में लाइनें बेकार


खाद की किल्लत ने बिगाड़ी किसानों की नींद,रात में उठान, दिन में लाइनें बेकार

किसान सेंटर सिधुआ बांगर, बांडिपुल, कंखोरिया, धर्मपुर बुजुर्ग मे खाद गायब

कुशीनगर/संवाददाता।
रबी सीजन की बुआई चरम पर है, लेकिन जिले की सहकारी समितियों पर खाद को लेकर भारी अव्यवस्था देखने को मिल रही है। किसानों का आरोप है कि सरकार द्वारा उपलब्ध बताया जा रहा खाद जमीनी स्तर पर किसानों तक पहुँच ही नहीं पा रहा है। समिति पर सुबह पहुँचने वाले किसानों को बार-बार यही सुनने को मिलता है—“खाद रात में बंट गया” या “स्टॉक खत्म हो गया।”

रात में उठ जा रही पूरी खेप, बिचौलियों पर संदेह

किसानों का कहना है कि खाद की गाड़ियाँ आते ही बिचौलिये सक्रिय हो जाते हैं और एनपीके व डीएपी खाद की पूरी खेप रात के अंधेरे में उठा ली जाती है। सुबह जब छोटे किसान समिति पहुँचते हैं, तो उन्हें सिर्फ खाली रजिस्टर और औपचारिक जवाब मिलता है।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यह स्थिति किसी प्राकृतिक कमी का परिणाम नहीं, बल्कि कृत्रिम संकट है, जिसमें मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।

छोटे किसानों पर सबसे बड़ा संकट

खाद की किल्लत का सबसे बड़ा असर छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ रहा है। बड़े किसान किसी तरह महंगे दाम पर बाजार से खरीद लेते हैं, लेकिन सीमित आय वाले किसान महंगी खाद नहीं खरीद पाते।
इस वजह से कई किसान गेहूँ, चना, मटर और गन्ना बिना खाद के ही बोने को मजबूर हैं।

किसानों का कहना है कि बिना खाद के बुआई करने से फसल की पैदावार बुरी तरह प्रभावित होगी और आगे चलकर घरेलू अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा।

किसानों में गुस्सा, “रात में किसको बांटा गया?”

कई किसानों ने आरोप लगाया कि जब भी खाद की गाड़ी आती है, वह सुबह तक गायब हो जाती है। एक किसान ने कहा—
“हम रात में जागते हैं, सुबह लाइन में लगते हैं… लेकिन बार-बार यही सुनते हैं—रात में बंट गया। आखिर रात में किसको बांटा गया?”

प्रशासन से निगरानी बढ़ाने और कार्रवाई की मांग

किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि

  • रात में खाद उठान पर सख्त रोक लगाई जाए,
  • वितरण प्रक्रिया की सीसीटीवी निगरानी अनिवार्य की जाए,
  • बिचौलियों और दोषी कर्मचारियों पर तुरंत कार्रवाई की जाए,
  • और किसानों को टोकन प्रणाली द्वारा पारदर्शी वितरण सुनिश्चित किया जाए।

ग्रामीण क्षेत्रों में खाद संकट गहराने के साथ किसानों की चिंता और नाराजगी लगातार बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर जिले की कृषि व्यवस्था और उत्पादन पर पड़ेगा।


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