निजी लाभ पहुँचाने वाले प्रधानों ने तोड़ा योगी सरकार का जीरो टॉलरेंस!

कुशीनगर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति को गांवों में तैनात कुछ जिम्मेदारों ने मज़ाक बना दिया है। जनपद कुशीनगर के पडरौना विकासखंड के दर्जनों ग्राम पंचायतों में प्रधानों और लेखपालों की मिलीभगत से सरकारी योजनाओं में जमकर धांधली का खेल चल रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, आवासीय पट्टा वितरण में भारी अनियमितता की गई। जिन लोगों के पास पहले से पक्के मकान, जमीन और समुचित संसाधन हैं, उन्हें पात्र दिखाकर पट्टा दे दिया गया, जबकि गरीब व वास्तविक पात्रों को सूची से बाहर रखा गया।
सूत्रों का कहना है कि लेखपालों ने बिना मौके की जांच किए ही कागजों पर पट्टा काट दिए। यही नहीं, प्रधानों की मनमानी से कई संपन्न परिवार सरकारी लाभ उठा रहे हैं।
आवास योजना में भी घोटाले की बू—जिनके पास पहले से मकान हैं, उन्हें दोबारा आवास आवंटित किए गए, जबकि सच्चे जरूरतमंद आज भी छत के लिए भटक रहे हैं।
मनरेगा में भी गड़बड़ी का खेल:
गांवों में ऐसे दर्जनों मामले सामने आए हैं, जहां जॉब कार्ड धारकों के नाम पर बिना काम कराए मजदूरी की रकम निकाल ली गई। बताया जाता है कि कुछ बैंक कर्मियों की मिलीभगत से श्रमिकों के खातों से धन निकाल लिया गया और जांच की फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी गईं।
जांच बनी दिखावा:
शिकायतों के बाद प्रशासन ने जांच अधिकारी तो नियुक्त किए, लेकिन सच दफन रह गया। ग्रामीण आज भी उम्मीद लगाए हैं कि अगर मौके से दोबारा सर्वे कराया जाए तो सच्चाई सामने आ सकती है।
गांव की राजनीति में आमजन बना शिकार
बीते 10 वर्षों से ग्राम स्तर की राजनीति में गरीबों को सिर्फ आश्वासन मिला है। सवाल उठता है कि जब जांच रिपोर्ट में गड़बड़ियां उजागर हुई थीं तो गलत रिपोर्ट तैयार करने वाले जिम्मेदारों के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
प्रधानी का कार्यकाल समाप्ति की ओर है, लेकिन भ्रष्टाचार के इस खेल का हिसाब कौन देगा