फरियादियों की बढ़ी भीड़ – न्याय की आस में कप्तान के दरबार पहुंचे लोग


फरियादियों की बढ़ी भीड़ – न्याय की आस में कप्तान के दरबार पहुंचे लोग

थानों पर नहीं होता काम, तभी एसपी ऑफिस पहुंचते हैं लोग

जनता की उम्मीदें बढ़ीं, पर न्याय अब भी दूर — सिर्फ 2% मामलों में होती है कार्रवाई
रिपोर्ट : के.एन. साहनी, कुशीनगर

कुशीनगर। जनपद कुशीनगर में नए पुलिस कप्तान केशव कुमार मिश्रा के पदभार ग्रहण करने के बाद जनता में नई उम्मीदें जगी हैं। फरियादियों का मानना है कि अब उनकी समस्याओं का समाधान होगा और उन्हें न्याय मिलेगा। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कह रही है।

जनपद के 22 थाना क्षेत्रों से रोजाना सैकड़ों की संख्या में पीड़ित एसपी कार्यालय पहुंच रहे हैं। इनमें से ज्यादातर वे लोग हैं, जिन्होंने थानों के कई चक्कर काटे लेकिन उनकी फरियाद नहीं सुनी गई। थानों में कार्रवाई न होने से निराश होकर वे अब सीधे कप्तान के दरबार में न्याय की गुहार लगाने आते हैं।

थानों में नहीं होती सुनवाई, फरियादियों की मजबूरी

फरियादियों का कहना है कि थानों पर प्रार्थना पत्र देने के बाद भी कई दिनों तक कोई सुनवाई नहीं होती। कई बार तो उन्हें थानेदार से मिलने तक नहीं दिया जाता।
एक फरियादी ने बताया—

“पांच दिनों तक थाना प्रभारी के चक्कर लगाए, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। मजबूर होकर एसपी ऑफिस आया हूं। अगर यहां भी थानों जैसी स्थिति रही, तो गरीब आदमी जाएगा कहां?”

सिर्फ 2 प्रतिशत मामलों में ही कार्रवाई

सूत्रों की मानें तो एसपी कार्यालय में आने वाले कुल प्रार्थना पत्रों में से केवल 2 प्रतिशत मामलों में ही ठोस कार्यवाही हो पाती है। बाकी प्रार्थनाओं पर रीडर द्वारा संबंधित थाना प्रभारी को सूचना देकर औपचारिकता पूरी कर दी जाती है।
थानेदारों को निर्देश भेजे जाने के बावजूद अक्सर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, जिससे जनता की नाराजगी बढ़ रही है।

संवेदनशील और सख्त छवि के अधिकारी हैं कप्तान मिश्रा

पुलिस कप्तान केशव कुमार मिश्रा को एक संवेदनशील और न्यायप्रिय अधिकारी के रूप में जाना जाता है। उनके आने से जनता में यह भरोसा पैदा हुआ है कि अब मनमानी और लापरवाही करने वाले थाना प्रभारियों पर कार्रवाई होगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर कप्तान मिश्रा स्वयं हर सप्ताह जनसुनवाई की समीक्षा करें, तो निचले स्तर पर सुधार लाया जा सकता है।

योगी सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति पर उठ रहे सवाल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की “जीरो टॉलरेंस” नीति को जमीनी स्तर पर लागू करने की जिम्मेदारी पुलिस विभाग पर है। लेकिन जब थानों पर ही पीड़ितों की सुनवाई नहीं हो रही, तो यह नीति सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाती है।
जनता का कहना है कि यदि कप्तान मिश्रा ने इस पर सख्ती नहीं दिखाई, तो आम आदमी का पुलिस पर से भरोसा टूट जाएगा।

जनता की आखिरी उम्मीद – कप्तान का दरबार

फिलहाल कुशीनगर जिले के हर कोने से पीड़ित एसपी ऑफिस पहुंच रहे हैं।
लोगों की आंखों में एक ही आस है —

“अगर कप्तान साहब ने नहीं सुना, तो फिर न्याय कहां मिलेगा?”


(के.एन. साहनी, वरिष्ठ संवाददाता


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