पूर्वांचल गांधी की राष्ट्रपति से अपील — “हिंदू राष्ट्र” शब्द को राष्ट्रविरोधी घोषित किया जाए
गोरखपुर, 9 नवंबर 2025।
शांतिवंश शोध पुस्तकालय के संस्थापक एवं “पूर्वांचल गांधी” के नाम से विख्यात डॉ. संपूर्णानंद मल्ल (पीएचडी, इतिहास विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय) ने राष्ट्रपति महोदय को संबोधित एक पत्र में देश की एकता और संविधान की रक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं।
उन्होंने कहा कि देश के भीतर “हिंदू राष्ट्र”, “खालिस्तान” और “पाकिस्तान” जैसे शब्दों को अलगाववादी और राष्ट्रविरोधी घोषित किया जाए, क्योंकि ये भारत की एकता को कमजोर करने वाले विचार हैं।
डॉ. मल्ल ने लिखा — “सत्यपथ इकलौता मार्ग है जिस पर मैं चलता हूं। मुझे संविधान चाहिए — न कम, न अधिक।”
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर आरोप लगाया कि उन्होंने लोकतंत्र और संविधान की भावना को आहत किया है।
डॉ. मल्ल ने कहा कि आज भारत “आर्थिक अराजकता” (Economic Anarchy) की स्थिति में है और देश को बचाने के लिए विख्यात अर्थशास्त्री डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी जैसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री के बयानों को अलगाववादी बताते हुए कहा कि “जब भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, राजेंद्र लाहिड़ी और डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कभी ‘हिंदू राष्ट्र’ की बात नहीं की, तब आज के नेता यह शब्द क्यों उठा रहे हैं?”
उनका कहना है कि “हिंदू राष्ट्र” अपने आप में अलगाववादी शब्द है, जो “हिंदू-मुस्लिम एकता” से भिन्न है, जबकि यही एकता भारत की असली पहचान है।
उन्होंने यह भी कहा कि धीरेंद्र शास्त्री को दी गई वाई-श्रेणी सुरक्षा तत्काल समाप्त की जाए, क्योंकि ऐसे व्यक्तियों को सुरक्षा देना संविधान और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है।
अंत में डॉ. मल्ल ने कहा —
“भारत अपने उदय काल से भारत है। संविधान में इसे ‘भारत दैट इज इंडिया’ कहा गया है। हम दिल से इसे हिंदुस्तान पुकारते हैं — यही हमारे शहीदों की आवाज़ थी।”
और उन्होंने संकल्प लिया —
“जब तक मेरे शरीर में प्राण रहेगा, तब तक जनहित के मामलों में लिखता रहूंगा और सत्याग्रह करता रहूंगा।”
यह पत्र राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश और गृह मंत्री को संबोधित किया गया है।