नारकीय जीवन जीने को विवश सिधुआ बांगर के लोग
जिला मुख्यालय के पास विकास की रोशनी नहीं, अंधेरों में डूबा गाँव, रास्ते मे पसरा गन्दा पानी
कुशीनगर। जिला मुख्यालय के बिल्कुल पास स्थित सिधुआ बांगर गाँव आज भी विकास से कोसों दूर है। गाँव में प्रवेश करने वाला मुख्य मार्ग किसी सड़क से अधिक खेत जैसा दिखाई देता है। उखड़ी हुई मिट्टी, बिखरे ईंट के टुकड़े और बजबजाती कीचड़ से गुजरना यहाँ आने-जाने वाली छोटी-बड़ी गाड़ियों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है।
बीमार महिला और बच्चों को अस्पताल तक ले जाना ग्रामीणों के लिए रोज़ाना की चुनौती बन चुका है। बारिश के दिनों में यह रास्ता पूरी तरह दलदल में बदल जाता है, जिससे फिसलने और गिरने की घटनाएँ आम हो गई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि “कहावत है—चिराग तले अंधेरा” और यह सिधुआ बांगर पर पूरी तरह लागू होती है। जिला मुख्यालय, जहाँ विकास योजनाओं का खजाना मौजूद है, वहीं से कुछ ही दूरी पर बसे इस गाँव का हाल देखकर अफसरों की कार्यशैली पर सवाल उठना लाजमी है। जिलाधिकारी, सीडीओ और जिले भर के अधिकारी पास में होने के बावजूद यहाँ का रास्ता वर्षों से बदहाल है।
– के. एन. साहनी, कुशीनगर