रक्षाबंधन: प्रेम, विश्वास और अपनत्व का पावन बंधन


🌸 रक्षाबंधन: प्रेम, विश्वास और अपनत्व का पावन बंधन 🌸

✍️ के. एन. साहनी
एडिटर – सच्ची रिपोर्ट, उत्तर प्रदेश
निवास स्थान: जिला मुख्यालय, कुशीनगर

रक्षाबंधन सिर्फ़ एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह दिलों को जोड़ने वाली डोर और स्नेह व सुरक्षा के वचन का अद्भुत प्रतीक है।
इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके सुख, समृद्धि और लंबी आयु की कामना करती हैं, और भाई जीवनभर रक्षा का वचन देता है।

लेकिन इस बार का रक्षाबंधन मैं सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं रखना चाहता।
यह संदेश उन सभी अपने-अपनों के नाम है, जो किसी वजह से हमसे दूर हो गए हैं, नाराज़ हैं या मन में कोई शिकायत रखते हैं।

प्रियजन,
ज़िंदगी बहुत छोटी है…
रूठने और मनाने के चक्कर में कहीं हम वो अनमोल लम्हे न खो दें, जिनकी कमी हमें बाद में सालों तक महसूस हो।
अगर कभी मेरी किसी बात या व्यवहार से आपको ठेस पहुँची हो, तो मैं दिल से क्षमा चाहता हूँ।
आइए, इस पावन अवसर पर हम सभी मनमुटाव, दूरी और शिकायतों की दीवार गिराकर, फिर से एक-दूसरे का हाथ थाम लें

राखी का धागा केवल कलाई पर नहीं, दिलों में भी बंधना चाहिए।
यही इस पर्व का असली संदेश है—दूरी मिटाओ, अपनापन बढ़ाओ।

इस शुभ अवसर पर, मैं जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, मुख्य विकास अधिकारी सहित जनपद कुशीनगर के सभी अधिकारीगण, कर्मचारीगण, मीडिया साथियों और जिले की समस्त जनता जनार्दन को रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं देता हूँ।

ईश्वर से प्रार्थना है कि यह पर्व आपके जीवन में खुशियों, स्वास्थ्य, भाईचारे और समृद्धि की अखंड ज्योति जलाए रखे, और हमारे जिले में हमेशा सौहार्द व विकास की रोशनी फैली रहे।


“रिश्तों की मजबूती राखी के धागे में नहीं, बल्कि उस सच्ची नीयत में है जो दिलों को जोड़ती है।”


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