जानकीनगर की नारकीय स्थिति: जलनिकासी की बदहाली पर फिर छिड़ी बहस


जानकीनगर की नारकीय स्थिति: जलनिकासी की बदहाली पर फिर छिड़ी बहस

रिपोर्ट: के एन साहनी, सच्ची रिपोर्ट उत्तर प्रदेश

कसया-पडरौना मार्ग, कुशीनगर।
जिले की प्रमुख और अति व्यस्त मानी जाने वाली कसया-पडरौना सड़क पर स्थित श्रीराम जानकीनगर, जिसे आमजन “जगती का मशीन” के नाम से जानते हैं, इन दिनों दुर्दशा की चपेट में है। यहाँ जलनिकासी की लचर व्यवस्था ने एक बार फिर नागरिकों की परेशानी को बढ़ा दिया है।

जानकीनगर की तस्वीर

ध्यान देने वाली बात यह है कि बीते वर्ष जब “सच्ची रिपोर्ट” ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था, तब प्रशासन हरकत में आया था। तत्काल जेसीबी मंगवाकर दोनों ओर नाली की खुदाई कराई गई थी और अस्थायी समाधान निकाला गया था। लेकिन आज हालात फिर पुराने जैसे हो चले हैं। वह नाली एक बार फिर बंद कर दी गई है, जिसके चलते गंदा पानी सड़कों पर बहता है, रुकता है और सड़ता है।

चारपहिया वाहनों की तेज रफ्तार से उड़ती कीचड़ की छींटें स्थानीय राहगीरों के कपड़ों से लेकर आत्मसम्मान तक को भिगो रही हैं। इससे आमजन में गहरा आक्रोश व्याप्त है, लेकिन फिर भी कहीं कोई ठोस कदम दिखाई नहीं देता।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदेश सरकार के एक लोकप्रिय मंत्री अक्सर इसी मार्ग से विकास कार्यों की समीक्षा के लिए गुजरते हैं। फिर भी यह गंदगी और दुर्गंध उन्हें नहीं दिखती? अगर वह चाहें तो जानकीनगर की तस्वीर एक दिन में बदल सकती है, लेकिन अफसोस कि ऐसा नहीं हो रहा।

जानकीनगर चौराहा, जो विकास का प्रतीक बन सकता था, आज एक बड़ा सवाल बन गया है। यहाँ स्थायी जलनिकासी की कोई योजना नहीं दिख रही। स्थानीय नागरिक एक-दूसरे की तकलीफें देखकर भी सामूहिक आवाज उठाने से कतराते हैं — आखिर क्यों?

यह सवाल केवल जानकीनगर का नहीं, बल्कि उस समूचे सिस्टम का है जो प्रतिक्रिया में नहीं, सिर्फ प्रदर्शन में यकीन करता है।


यदि यह मुद्दा आपके मोहल्ले, गाँव या शहर से जुड़ा है, तो आप भी आवाज़ उठाएं — क्योंकि चुप्पी सबसे बड़ी बीमारी है।
✍️ के एन साहनी
जन सरोकार की सच्ची रिपोर्ट


Related Post

Leave a Comment