“जब मैं तिरंगा लेकर दिल्ली की सड़कों पर उतरूंगा…” राष्ट्रपति को भावुक चिट्ठी लिख बोले डॉ. सम्पूर्णानंद, संसद में अपराधियों के विरुद्ध मांगा जवाब
कुशीनगर/नई दिल्ली।
शांतिवन शोध पुस्तकालय से जुड़े लेखक व चिंतक डॉ. सम्पूर्णानंद ने 1 अगस्त 2025 को देश की महामहिम राष्ट्रपति को एक भावुक और सशक्त पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने भारतीय लोकतंत्र की वर्तमान स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। यह पत्र भ्रष्टाचार, अपराध, जातिवाद, पूंजीवाद, पाखंड, और बढ़ती आर्थिक विषमता जैसे मुद्दों पर तीखा सवाल खड़ा करता है।

डॉ. सम्पूर्णानंद ने लिखा है:
“आज संसद और विधानसभाओं में आधे से अधिक सदस्य चोर, लुटेरे, ऐश्वर्य विलासी, बलात्कारी, नफरती और जातिवादी हैं। अगर इन्हीं अपराधों के आधार पर अन्य विभागों से कर्मचारी निकाले जाते हैं, तो फिर विधायिका में ऐसे लोगों को बैठने की अनुमति क्यों?”
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि वोटिंग सिस्टम के माध्यम से ऐसे लोगों को हटाना आसान नहीं, क्योंकि जो जितना भ्रष्ट है, उसके चुने जाने की संभावना उतनी ही अधिक हो जाती है।
चिट्ठी में महात्मा गांधी के ‘स्वराज’, भगत सिंह के ‘समाजवाद’, डॉ. अंबेडकर के ‘संविधान’ और डॉ. कलाम के ‘विज्ञानवाद’ का उल्लेख करते हुए पूछा गया है कि क्या ये सब मूल्य आज के भारत में कहीं खो चुके हैं?
डॉ. सम्पूर्णानंद ने एक महामंत्र भी सुझाया:
“गरीब-अमीर सभी के लिए ‘एक विद्यालय’, ‘एक चिकित्सालय’, ‘एक रेल’ – और आटा, चावल, दाल, तेल, दवा, शिक्षा, चिकित्सा व रेल पर कोई जीएसटी या टैक्स नहीं होना चाहिए।”
चिट्ठी के अंत में उन्होंने चेतावनी के रूप में लिखा:
“जब मैं तिरंगा लेकर दिल्ली की सड़कों पर उतरूंगा तब 80 करोड़ कंगाल और 22 करोड़ कुपोषितों की आवाज बनकर कहूंगा – अब और नहीं। ऐश्वर्य और भोगविलास में डूबे सत्ता के लोग इस देश की आत्मा को लील रहे हैं।”
यह चिट्ठी न केवल एक व्यक्ति की पीड़ा है, बल्कि करोड़ों भारतीयों की व्यथा को स्वर देती है। अब देखना यह है कि क्या देश का शीर्ष नेतृत्व इस पुकार को सुनता है?
रिपोर्ट: के.एन. साहनी,
संपर्क: सच्ची रिपोर्ट, उत्तर प्रदेश।