गोरखपुर विश्वविद्यालय में नियुक्ति की मांग को लेकर 15 जुलाई से सत्याग्रह”


“गोरखपुर विश्वविद्यालय में नियुक्ति की मांग को लेकर 15 जुलाई से सत्याग्रह”

रिपोर्ट: के. एन. सहानी, सच्ची रिपोर्ट उत्तर प्रदेश

गोरखपुर। विश्वविद्यालयों में नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पीएच.डी. की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाते हुए डॉ. संपूर्णानंद मल्ल, दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग से पीएच.डी धारक और यूजीसी नेट-जेआरएफ चयनित शोधार्थी, ने 15 जुलाई से गोरखपुर में सत्याग्रह करने की घोषणा की है।

डॉ. मल्ल का कहना है कि वे 30 अगस्त 2003 से गोरखपुर विश्वविद्यालय में मानदेय पर कार्यरत रहे हैं, और उनके शैक्षिक अभिलेख न केवल प्रथम श्रेणी में स्नातकोत्तर (PG), बल्कि यूजीसी-नेट, जेआरएफ, एवं प्रतिष्ठित ‘आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया’ से जुड़े अनुभवों से समृद्ध हैं। बावजूद इसके, उन्हें अब तक स्थायी नियुक्ति नहीं दी गई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में जिन आचार्यों को पीएच.डी. उपाधि प्राप्त है, उनमें कई की डिग्रियों में प्लेजरिज्म (नकल) है, और शोध कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न हैं। डॉ. मल्ल ने प्रश्न किया कि “यदि मैं अयोग्य हूँ तो फिर इस विश्वविद्यालय के 300 आचार्य में से कौन योग्य है?” उन्होंने विश्वविद्यालय की अकादमिक पारदर्शिता पर भी सवाल खड़ा किया।

डॉ. मल्ल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल उत्तर प्रदेश, मानव संसाधन विकास मंत्री, यूजीसी अध्यक्ष, और गोरखपुर के उच्च प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की जानकारी दी है और मांग की है कि उन्हें वरिष्ठता के आधार पर “प्रोफेसर ऑफ आर्कियोलॉजी” के पद पर नियुक्त किया जाए।

यदि 15 जुलाई तक इस पर कोई निर्णय नहीं होता, तो उन्होंने गोरखपुर की सड़कों पर सत्याग्रह एवं प्रोटेस्ट की चेतावनी दी है। उन्होंने यह भी मांग की है कि विश्वविद्यालय की पीएच.डी. डिग्रियों की जांच कराई जाए, और नकल की पुष्टि होने पर कड़ी कार्रवाई की जाए।


संवाददाता संपर्क:
के. एन. सहानी
सच्ची रिपोर्ट उत्तर प्रदेश
मो: 9453013386

आंदोलनकारी:
डॉ. संपूर्णानंद मल्ल (पूर्वांचल गांधी)
PG (प्रथम श्रेणी), यूजीसी नेट, जेआरएफ,
PhD इन आर्कियोलॉजी, दिल्ली विश्वविद्यालय
मो: 9415418263


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