चकबंदी विभाग की लापरवाही से उपजा विवाद, डॉ. सम्पूर्णानंद मल्ल ने उठाए गंभीर सवाल


चकबंदी विभाग की लापरवाही से उपजा विवाद, डॉ. सम्पूर्णानंद मल्ल ने उठाए गंभीर सवाल

देवरिया। चकबंदी विभाग की कथित लापरवाही और मिलीभगत के चलते घुड़ीपुर कला गांव का एक जमीनी मामला गंभीर विवाद में तब्दील हो गया है। पूर्वांचल गांधी के नाम से विख्यात डॉ. सम्पूर्णानंद मल्ल ने जिलाधिकारी देवरिया को पत्र लिखते हुए सवाल उठाया है कि जब पूरा प्रकरण चकबंदी विभाग की घोर लापरवाही का परिणाम है, तो दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध अब तक प्राथमिकी क्यों नहीं दर्ज की गई?

डॉ. मल्ल ने आरोप लगाया है कि अप्रैल 2024 में चकबंदी प्रक्रिया के दौरान उनकी 21 कड़ी जमीन अपराधी प्रवृत्ति के व्यक्तियों के चक में जोड़ दी गई। इसके बाद उनकी अनुपस्थिति में उनकी बाउंड्री में अवैध रूप से घुसकर जबरन कब्जे की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि उन्होंने खेत बेचकर अपने दरवाजे की जमीन बनाई है, जो चकबंदी उपरांत विधिवत रूप से स्वीकृत है।

उन्होंने कहा,
“जब चकबंदी विभाग की गलती से विवाद खड़ा हुआ है, तो उसके जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? क्या प्रशासन किसी अप्रिय घटना की प्रतीक्षा कर रहा है?”

डॉ. मल्ल ने यह भी बताया कि 11 मार्च को चकबंदी कानूनगो राजेंद्र शर्मा ने अपराधी तत्वों के साथ मिलकर उनकी अनुपस्थिति में उनकी बाउंड्री के अंदर प्रवेश कर चकबंदी की, जो कानूनन पूरी तरह आपत्तिजनक और आपराधिक कृत्य है। बावजूद इसके, अब तक उनके खिलाफ कोई मुकदमा पंजीकृत नहीं किया गया।

उन्होंने मुख्यमंत्री, राजस्व परिषद अध्यक्ष, मुख्य सचिव, आयुक्त चकबंदी, गृह सचिव, मंडलायुक्त गोरखपुर, डीजीपी उत्तर प्रदेश तथा अन्य अधिकारियों को पत्र भेजकर तत्काल सुरक्षा मुहैया कराने, बाउंड्री की रक्षा करने और चकबंदी विभाग की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

“जिम्मेदारों को सजा न मिलने से प्रशासन की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगता है।” – डॉ. मल्ल


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