विश्व शांति की गूँज: बुद्ध की धरती कुशीनगर से ‘पूर्वांचल गांधी’ का शांति शंखनाद

कुशीनगर। जहाँ तथागत बुद्ध ने ‘अप्प दीपो भव’ और ‘अहिंसा’ का मार्ग दिखाया, उसी पावन महापरिनिर्वाण स्थली से एक बार फिर मानवता को बचाने की पुकार उठी है। ‘पूर्वांचल गांधी’ के नाम से विख्यात समाजसेवी ने विश्व में बढ़ते युद्ध के उन्माद और गाजा-फिलिस्तीन में मासूमों के लहू पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए 3 अप्रैल से ‘शांति सत्याग्रह’ का ऐलान किया है।

“अब सहा नहीं जाता मानवता का विनाश”

जिलाधिकारी कुशीनगर को लिखे अपने भावुक और दृढ़ पत्र में सत्याग्रही ने स्पष्ट किया है कि आधुनिक युग में युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने पत्र में लिखा:

“अब मुझे सहा नहीं जाता, मानवता का और अधिक विनाश मैं नहीं देख सकता। यह सत्याग्रह केवल एक विरोध नहीं, बल्कि दुनिया भर में चल रहे युद्धों के विरुद्ध एक मौन प्रार्थना और जागृति का प्रयास है।”

न्याय और सुरक्षा की मांग

अतीत के अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने प्रशासन को आगाह किया कि पिछले वर्ष (नवंबर 2023) जब वे इसी मानवीय उद्देश्य के लिए सत्याग्रह पर थे, तब कुछ असामाजिक तत्वों ने शांति के इस मार्ग में बाधा पहुँचाने का प्रयास किया था। शांति के इस पावन कार्य में कोई खलल न पड़े, इसके लिए उन्होंने आयुक्त, ADG, और SP कुशीनगर से सुरक्षा के कड़े प्रबंध करने की अपील की है।

क्यों खास है यह सत्याग्रह?

  • अहिंसा का मार्ग: यह आंदोलन गांधीवादी मूल्यों पर आधारित है।
  • वैश्विक संदेश: कुशीनगर से उठने वाली यह आवाज केवल स्थानीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध विराम और शांति की अपील है।
  • मानवता सर्वोपरि: इसका उद्देश्य सीमाओं से परे जाकर निर्दोष बच्चों और आम नागरिकों के जीवन की रक्षा करना है।

संपादकीय अपील: शांति ही एकमात्र विकल्प

आज जब दुनिया बारूद के ढेर पर बैठी है, ‘पूर्वांचल गांधी’ जैसे व्यक्तित्व हमें याद दिलाते हैं कि घृणा को केवल प्रेम से और हिंसा को केवल अहिंसा से जीता जा सकता है। आइए, हम सब इस शांति संदेश की राह पर चलें और एक ऐसे समाज का निर्माण करें जहाँ युद्ध की विभीषिका नहीं, बल्कि बुद्ध की करुणा का वास हो।

शांति की ओर एक कदम बढ़ाएं। क्योंकि जब इंसानियत जीतती है, तभी दुनिया जीतती है।

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