गोरखपुर में जिला अस्पताल विवाद को लेकर 30 दिन में जांच की मांग, डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने प्रशासन को सौंपा पत्र

गोरखपुर में जिला अस्पताल विवाद को लेकर 30 दिन में जांच की मांग, डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने प्रशासन को सौंपा पत्र

गोरखपुर, 15 फरवरी 2026।
जिला चिकित्सालय गोरखपुर के चिकित्सकों पर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. संपूर्णानंद मल्ल (पूर्वांचल गांधी) ने जिलाधिकारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र सौंपा है। उन्होंने आरोपों की 30 दिन के भीतर जांच कर निष्कर्ष सार्वजनिक करने की मांग की है।
डॉ. मल्ल ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि स्वतंत्र पत्रकार सत्येंद्र शर्मा (पूर्व रिपोर्टर, सी न्यूज़ गोरखपुर) द्वारा जिला अस्पताल के कई चिकित्सकों और कर्मचारियों के विरुद्ध मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय एवं स्वास्थ्य विभाग को लगातार शिकायतें भेजी जा रही हैं। उनका कहना है कि पूर्व में कराई गई विभागीय जांच में आरोप निराधार पाए गए थे, इसके बावजूद पुनः पत्राचार कर अस्पताल प्रशासन पर दबाव बनाया जा रहा है, जिससे चिकित्सकों में मानसिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
पत्र में डॉ. मल्ल ने बताया कि पूर्व में पत्रकार सत्येंद्र शर्मा पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई के दौरान उन्होंने मानवीय आधार पर सहायता की थी तथा शांतिपूर्ण अनशन भी किया था। उस समय तत्कालीन एसएसपी डॉ गौरव ग्रोवर और एसपी सिटी कृष्ण बिश्नोई से वार्ता के बाद आश्वासन मिलने पर उन्होंने अनशन समाप्त किया था। बाद में शाहपुर थाना प्रकरण में उनकी पत्नी ने जमानतदार के रूप में भी सहयोग किया।
डॉ. मल्ल का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी अपराधी का समर्थन करना नहीं, बल्कि मानवीय आधार पर सहायता करना था। किंतु अब जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सकों—जिनमें डॉ. बी.के. सुमन सहित अन्य डॉक्टर एवं कर्मचारी शामिल हैं—के विरुद्ध लगाए जा रहे आरोपों से चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने प्रशासन से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं—
जिला अस्पताल के डॉक्टरों व कर्मचारियों पर लगाए गए आरोपों की 30 दिन के भीतर निष्पक्ष जांच।
यदि आरोप असत्य सिद्ध हों तो झूठी शिकायत के संबंध में भी विधिसम्मत कार्रवाई।
संपूर्ण प्रकरण की पारदर्शी समीक्षा कर संबंधित पक्षों से स्पष्टीकरण।
डॉ. मल्ल ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित अवधि में जांच पूरी नहीं होती है तो वे टाउन हॉल स्थित गांधी प्रतिमा पर पुनः शांतिपूर्ण अनशन करेंगे तथा जमानतदारी वापस लेने की प्रक्रिया प्रारंभ करेंगे।
इस संबंध में जिला प्रशासन की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है।

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