लोकतंत्र में असहमति की आवाज और पूर्वांचल गांधी डॉ. संपूर्णानंद मल्ल की गिरफ्तारी,,

लोकतंत्र में असहमति की आवाज और पूर्वांचल गांधी डॉ. संपूर्णानंद मल्ल की गिरफ्तारी,,


गोरखपुर। सामाजिक सरोकारों और जनहित के मुद्दों को लेकर लगातार मुखर रहने वाले पूर्वांचल गांधी के नाम से चर्चित डॉ. संपूर्णानंद मल्ल वर्तमान में जिला कारागार गोरखपुर में निरुद्ध हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और समर्थकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि लोकतंत्र में जनसमस्याओं को उठाने वाली आवाजों के प्रति प्रशासन का रवैया कैसा होना चाहिए।
समर्थकों के अनुसार, 10 जून 2026 को शाहपुर पुलिस डॉ. मल्ल के आवास पर पहुंची और उन्हें बातचीत के लिए साथ चलने को कहा। बाद में उन्हें शांति व्यवस्था संबंधी कार्रवाई के तहत जेल भेज दिया गया। समर्थकों का दावा है कि डॉ. मल्ल का कोई आपराधिक इतिहास नहीं रहा है तथा वे लंबे समय से गांधीवादी और लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात रखते रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि 8 जून 2026 को गोरखपुर प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस वार्ता में डॉ. मल्ल ने डीडीयू गोरखपुर प्रकरण सहित विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात प्रमुखता से रखी थी। इस प्रेस वार्ता को स्थानीय मीडिया ने भी प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
समर्थकों का कहना है कि डॉ. मल्ल का संघर्ष व्यक्तिगत नहीं बल्कि व्यवस्था में पारदर्शिता, न्याय और जनसरोकारों से जुड़े विषयों को लेकर रहा है। उनका मानना है कि लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है जब नागरिकों को शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से अपनी बात रखने का अवसर मिले।
जिला कारागार गोरखपुर में उनसे मिलने पहुंचे समर्थकों के अनुसार, डॉ. मल्ल ने कहा कि उनका संघर्ष आगे भी अहिंसक और गांधीवादी मार्ग पर जारी रहेगा। उन्होंने कथित रूप से कहा, “मैं जेल को अब अपना शांति गृह मानता हूं। यदि जनहित और सत्य की आवाज उठाने के लिए जेल जाना पड़ता है तो मैं इसके लिए तैयार हूं। मैं हर माह यहां आता रहूंगा ताकि जेल में बंद उन लोगों की पीड़ा को समझ सकूं जिनकी आवाज बाहर तक नहीं पहुंच पाती। मेरा प्रयास रहेगा कि मैं निर्दोष और उपेक्षित बंदियों की आवाज बनूं तथा उन्हें न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करूं।”
उन्होंने अपने समर्थकों से संविधान, लोकतंत्र और अहिंसा के मार्ग पर चलने की अपील करते हुए कहा कि समाज और राष्ट्र के हित में संवाद, सत्य और न्याय की लड़ाई निरंतर जारी रहनी चाहिए।
देश का संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार देता है। वहीं कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में आवश्यक है कि हर कार्रवाई कानून के दायरे में, पारदर्शी और न्यायसंगत तरीके से हो ताकि जनता का विश्वास लोकतांत्रिक संस्थाओं में बना रहे।
आज आवश्यकता इस बात की है कि मतभेदों का समाधान संवाद, संवेदनशीलता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से निकाला जाए। लोकतंत्र में विचारों का सम्मान और कानून का निष्पक्ष पालन ही राष्ट्रहित तथा समाजहित की सबसे बड़ी पहचान है।
रिपोर्ट : के. एन. साहनी / अंशुमान पांडेय

Related Post

Leave a Comment

Breaking News

Follow me

इस तरह की वेबसाइट बनवाने के लिए संपर्क करे

Mob 8948760348 Add- Ravindra Nagar, Padrauna, Kushinagar