चौपरिया सिधुआ पोखरा पर लगेगा चैत्र रामनवमी पर ऐतिहासिक मेला, सैंकड़ों साल पुरानी परंपरा आज भी जीवंत
केoएनo साहनी की रिपोर्ट

कुशीनगर। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद मुख्यालय के समीप, चौपरिया सिधुआ पोखरा और रबिंद्र नगर के बीच स्थित “मेला” स्थल पर इस वर्ष भी चैत्र रामनवमी के पावन अवसर पर भव्य धार्मिक आयोजन और मेले का आयोजन होने जा रहा है। सैंकड़ों साल पुरानी पौराणिक कथाओं में रचा-बसा यह मेला इस क्षेत्र की पहचान बन चुका है।
मेला समिति के अनुसार, यह ऐतिहासिक मेला दो ग्राम सभाओं के संयुक्त नेतृत्व में आयोजित किया जाता है। मेले का मुख्य आयोजन चैत्र रामनवमी के दिन होगा, लेकिन धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रम मेले के एक दिन पहले की रात से ही शुरू हो जाएंगे। पूरी रात और मेले के दिन धार्मिक नाच-गान, कीर्तन और भजनों का सिलसिला चलता रहेगा, जिससे वातावरण भक्तिमय हो जाएगा।
पोखरा (तालाब) का विशेष महत्व:
मेला स्थल चौपरिया सिधुआ पोखरा में स्थित विशाल तालाब (पोखरा) का पौराणिक और धार्मिक महत्व है। माना जाता है कि रामनवमी के पावन अवसर पर इस पोखरे में स्नान करना अत्यंत शुभ और पापमुक्तकारी होता है। मेले के दौरान श्रद्धालुगण पोखरे में आस्था की डुबकी लगाते हैं और माँ दुर्गा की पूजा-अर्चना के बाद पोखरे के जल से सूर्यदेव को अर्घ्य देते हैं। यह पोखरा न केवल मेले की सुंदरता बढ़ाता है, बल्कि भक्तों की आस्था का भी एक प्रमुख केंद्र है।
सुरक्षित और व्यवस्थित आयोजन:
आयोजन समिति और स्थानीय प्रशासन ने मेले को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। क्षेत्र के नर-नारी निर्भीक और सुरक्षित होकर धार्मिक कार्यक्रमों का आनंद ले सकें, इसके लिए स्थानीय पुलिस और समाज सेवी संगठन लगातार देखरेख करेंगे।
सजेंगी दुकानें, होगा विविध सामानों का विक्रय:
मेले में विभिन्न प्रकार की दुकानें लगेंगी, जहाँ घरेलू सामान, खिलौने, मिठाइयाँ, और अन्य उपयोगी वस्तुएँ बिकेंगी। यह मेला स्थानीय लोगों के लिए व्यापार और मनोरंजन का एक प्रमुख केंद्र है।
धार्मिक अनुष्ठान और माँ दुर्गा की पूजा:
मेला स्थल चौपरिया पोखरा दुर्गा शिवमंदिर में माँ दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान आयोजित किए जाएँगे। भक्तगण माता का आशीर्वाद लेने और मेले में शामिल होने के लिए दूर-दूर से यहाँ पहुँचते हैं।
27 मार्च को लगेगा मेला:
इस वर्ष यह ऐतिहासिक मेला 27 मार्च को लगेगा। मेला समिति और स्थानीय लोगों ने सभी भक्तों और दर्शकों को मेले में शामिल होने और इस पौराणिक परंपरा का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है।
क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक:
चौपरिया सिधुआ पोखरा का यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर और सामाजिक सौहार्द का भी एक उदाहरण है। पीढ़ियों से चला आ रहा यह मेला आज भी अपने पूरे रंग में है और लोगों को एक सूत्र में बांधने का काम कर रहा है।

(लेखक के एन साहनी कुशीनगर से एक स्वतंत्र पत्रकार हैं।)