आस्था का अनूठा अर्पण, मन्नत पूरी होने पर मंदिर में लगते हैं हैंडपंप


मन्नत पूरी होते ही श्रद्धालु करा रहे हैं जनसेवा, 40 वर्षों में सैकड़ों हैंडपंप बने आस्था के प्रतीक
कुशीनगर(जगदीश सिंह)
हाटा तहसील क्षेत्र के उपनगर मथौली के वार्ड नं. 6 महाराणा प्रताप नगर (सिरसिया धूस टोला) स्थित माता सिंघासनी देवी मंदिर में आस्था की एक अनोखी परंपरा देखने को मिल रही है। यहां श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर मंदिर परिसर में हैंडपंप स्थापित कराते हैं। यह परंपरा वर्षों से जारी है और अब यह मंदिर श्रद्धा के साथ-साथ जनसहयोग और लोककल्याण का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है।
मंदिर के पुजारी बिकाऊ दास ने बताया कि श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार माता को भेंट अर्पित करते हैं, लेकिन अधिकांश लोग मन्नत पूरी होने पर हैंडपंप लगवाना सबसे श्रेष्ठ सेवा मानते हैं। उन्होंने बताया कि पहले यहां आम का घना बगीचा हुआ करता था और बहुत कम हैंडपंप दिखाई देते थे, लेकिन समय के साथ आस्था बढ़ी और आज पूरा परिसर हैंडपंपों से सुसज्जित हो गया है।
बताया जाता है कि यह परंपरा करीब 40 वर्ष पूर्व विकासखंड मोतीचक के बिशुनपुरा निवासी अंबिका गौड़ द्वारा शुरू की गई थी। मन्नत पूरी होने पर उन्होंने पहला हैंडपंप लगवाया, जिसके बाद यह सिलसिला लगातार बढ़ता गया।
वर्तमान में मंदिर परिसर में 50 से अधिक हैंडपंप दिखाई देते हैं, जबकि स्थानीय लोगों के अनुसार अब तक 100 से अधिक हैंडपंप स्थापित किए जा चुके हैं। हालांकि समय के साथ कई पुराने हैंडपंप निष्क्रिय हो गए हैं, फिर भी लगभग 25 से 30 हैंडपंप अभी भी चालू हालत में हैं।
यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि जनहित से भी गहराई से जुड़ी है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ये हैंडपंप पेयजल की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करते हैं। विशेषकर मेले और भीड़ के समय यह सुविधा बेहद उपयोगी साबित होती है।
एक वृद्ध महिला श्रद्धालु ने बताया कि माता की कृपा से मन्नत पूरी होने पर लोग अपनी श्रद्धा अनुसार भेंट चढ़ाते हैं, लेकिन हैंडपंप लगवाना सबसे पुण्य का कार्य माना जाता है।
माता सिंघासनी देवी मंदिर की यह परंपरा आज आस्था, विश्वास और सेवा भाव का जीवंत उदाहरण बन चुकी है, जो यह संदेश देती है कि सच्ची श्रद्धा हमेशा जनकल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है।