दीप बाबू अग्रवाल: आशा की वह किरण जो कभी बुझ नहीं सकती,

दीप बाबू अग्रवाल: आशा की वह किरण जो कभी बुझ नहीं सकती,

टीम सच्ची रिपोर्ट

जनपद कुशीनगर के पडरौना शहर की पहचान बन चुके वरिष्ठ समाजसेवी दीप बाबू अग्रवाल आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। सेवा, समर्पण और सहज उपलब्धता—ये तीन शब्द ही उनके व्यक्तित्व को परिभाषित करने के लिए काफी हैं।
कहते हैं कि किसी समाज की असली ताकत उसके सजग और संवेदनशील नागरिक होते हैं। दीप बाबू अग्रवाल उन्हीं में से एक हैं। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उनके दरवाजे पर पहुंचने वाला कोई भी व्यक्ति निराश होकर नहीं लौटता। हर फरियाद सुनी जाती है, हर समस्या को गंभीरता से लिया जाता है और हर संभव मदद का प्रयास किया जाता है।
दिखने में एक साधारण व्यक्ति, लेकिन सोच में असाधारण—यही उनकी असली पहचान है। कृषि हो या शिक्षा, स्वास्थ्य का क्षेत्र हो या व्यवसाय—हर विषय पर उनकी गहरी समझ और अनुभव लोगों को मार्गदर्शन देता है। समाज के हर वर्ग के लोग उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखते हैं और विभिन्न मंचों पर आमंत्रित कर उनके विचारों से लाभान्वित होते हैं।
उनकी दानशीलता की तुलना लोग महाभारत के कर्ण से करते हैं। अपने सैकड़ों दुखों को स्वयं तक सीमित रखकर, दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाना ही उनका जीवन मंत्र है। वे बिना किसी प्रचार-प्रसार के चुपचाप लोगों का काम कर देते हैं—सामने वाले को यह तक पता नहीं चलता कि उसके पीछे किसका हाथ था।
आज जब समाज में स्वार्थ और दिखावे की प्रवृत्ति बढ़ रही है, ऐसे समय में दीप बाबू अग्रवाल जैसे समाजसेवी एक मिसाल हैं। सच में, ऐसे लोग किसी एक शहर या जिले की नहीं, पूरे देश की धरोहर होते हैं।
ऐसे समर्पित समाजसेवी हमारे देश में और कहाँ मिलते हैं?

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