पूर्वांचल गांधी का राज्यपाल को पत्र: गोरखपुर विश्वविद्यालय में शोध व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल
गोरखपुर। पूर्वांचल गांधी के नाम से चर्चित डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने 14 अगस्त को राज्यपाल एवं कुलाधिपति को पत्र भेजकर दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (DDUGU) में उच्च शिक्षा और शोध व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। पत्र में उन्होंने विश्वविद्यालय में 18 अगस्त को प्रस्तावित एकेडमिक कार्यक्रम को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
डॉ. मल्ल ने अपने पत्र में दावा किया है कि विश्वविद्यालय में शोध एवं इनोवेशन को प्रदर्शित करने के नाम पर ऐसी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं, जिनकी अकादमिक उपयोगिता और गुणवत्ता पर सवाल उठाए जाने चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से सोशल साइंस से जुड़े विषयों में शोध मूल्यांकन की प्रक्रिया पर चिंता जताई है।
पत्र में इतिहास, पुरातत्व एवं अन्य सामाजिक विज्ञान विषयों में पीएचडी शोध की गुणवत्ता को लेकर हाइपोथेसिस, रिसर्च मेथडोलॉजी और प्लेगरिज्म की जांच पर सवाल उठाए गए हैं। डॉ. मल्ल का कहना है कि ऐसे मूल्यांकन के लिए संबंधित विषयों के विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है और उन्होंने विश्वविद्यालय में विशेषज्ञता को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने अपने पत्र में पूर्व के दौर का उल्लेख करते हुए प्रो. वी.एस. पाठक और प्रो. जयमल राय जैसे शिक्षकों की अकादमिक प्रतिष्ठा का हवाला दिया और कहा कि लगभग चार दशक पहले विश्वविद्यालय में शोध की प्रक्रिया को लेकर ऐसी स्थिति नहीं थी।
डॉ. मल्ल ने अपने पत्र में विश्वविद्यालय से पिछले करीब तीन दशकों में कराई गई पीएचडी की गुणवत्ता की उच्चस्तरीय जांच की मांग भी उठाई है। उन्होंने शोध कार्यों की मौलिकता और निर्धारित शोध पद्धति के पालन की जांच कराने की बात कही है।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
पत्र में डॉ. मल्ल ने राज्यपाल से उच्च शिक्षा एवं शोध व्यवस्था को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखने तथा विश्वविद्यालय की अकादमिक व्यवस्था की निष्पक्ष समीक्षा कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने इस संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, मानवाधिकार आयोग, लोकायुक्त, मुख्य सचिव, गृह विभाग एवं डीजीपी को भी पत्र की प्रति भेजे जाने का उल्लेख किया है।
डॉ. मल्ल ने अपने पत्र में विश्वविद्यालय की वर्तमान व्यवस्था पर कई तीखी राजनीतिक एवं वैचारिक टिप्पणियां भी की हैं। हालांकि, इन टिप्पणियों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस पत्र में लगाए गए आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ओम पत्रिका की रिपोर्ट: पत्र में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि किया जाना अभी बाकी है। विश्वविद्यालय प्रशासन अथवा संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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