
नशा मुक्ति केंद्र यातना स्थल और ‘नवीन आपराधिक उद्योग’, तत्काल बंद हों: डॉ. संपूर्णानंद मल्ल
राष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और गृह मंत्री को पत्र लिख लगाई गुहार
गोरखपुर के ‘प्रयास नशा मुक्ति केंद्र’ का दिया हवाला; कहा- जेल से भी बदतर हैं हालात, मौलिक अधिकारों की हो रही हत्या
गोरखपुर। नशा मुक्ति केंद्रों की आड़ में चल रहे काले कारनामों और मानवाधिकारों के हनन को लेकर डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने देश और प्रदेश के शीर्ष संवैधानिक व प्रशासनिक पदों पर बैठे उच्चाधिकारियों को एक बेहद गंभीर पत्र लिखा है। पत्र में नशा मुक्ति केंद्रों के संचालन की गहन जांच कराने और इन्हें तत्काल बंद करने की मांग की गई है। डॉ. मल्ल ने इन केंद्रों को सुधार गृह नहीं, बल्कि जीवन और स्वतंत्रता को दफन करने वाला ‘नवीन आपराधिक उद्योग’ करार दिया है।
‘उपचार’ या ‘आंतरिक यातना’?
डॉ. मल्ल ने पत्र में नशा मुक्ति केंद्रों के भीतर चल रही क्रूरता को उजागर करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सुधार के नाम पर लोगों की ‘जीवन और स्वतंत्रता’ के मौलिक अधिकार को दफन किया जा रहा है। इन केंद्रों के भीतर मरीजों को जानवरों की तरह पीटा जाता है और उपचार के नाम पर यह स्थल ‘आंतरिक यातना’ का गढ़ बन चुके हैं। इसके साथ ही, इसे एक नए ‘अपराधिक उद्योग’ की संज्ञा देते हुए उन्होंने कहा कि यहाँ मरीजों को रखने के लिए हर महीने 10,000 से 15,000 रुपये तक की किश्त वसूल कर भारी आर्थिक शोषण किया जा रहा है।
गोरखपुर के केंद्र का आंखों देखा हाल
डॉ. मल्ल ने अपने पत्र में प्रयास नशा मुक्ति केंद्र (साकेत नगर, बगहा बाबा मंदिर के पास, रुस्तमपुर, गोरखपुर) का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए अपने साथ घटी घटना को साझा किया। उन्होंने बताया कि बीते 22 या 23 जून को वे अपने घनिष्ठ मित्र और संपादक श्री अंशुमान पांडे से मिलने (मात्र दो मिनट के लिए) इस केंद्र पर गए थे।
वहां उन्हें उनके मित्र से मिलने नहीं दिया गया। केंद्र के संचालक ने बताया कि एक महीने से पहले या परिवार की लिखित अनुमति के बिना यहाँ किसी को किसी से भी मिलने की इजाजत नहीं दी जाती। डॉ. मल्ल ने इस पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा, “इससे बड़ा कोई क्राइम हो सकता है क्या? जेल में भी कैदी से मिलने की अनुमति होती है, लेकिन यहाँ बाहरी दुनिया से पूरी तरह काट दिया जाता है। यह मौलिक अधिकारों की सरेआम हत्या और अवैध बंधक बनाने जैसा है।”
मदिरालय और नशा मुक्ति केंद्रों का ‘समानुपाती संबंध’
पत्र में सरकार की आबकारी नीति और सामाजिक स्थिति के अंतर्विरोधों पर तीखा प्रहार किया गया है। डॉ. मल्ल के अनुसार, देश में मदिरालयों और नशा मुक्ति केंद्रों के बीच एक समानुपाती संबंध बन गया है। एक तरफ सरकार नित्य नए मदिरालय (शराब की दुकानें) खोल रही है, तो दूसरी तरफ समाज के दबंग, गुंडे और अपराधी तत्व नशा मुक्ति केंद्र खोलकर मोटी कमाई कर रहे हैं।
उन्होंने सरकार को स्पष्ट सुझाव दिया कि यदि सरकार शराब की फैक्ट्रियां और मदिरा की दुकानें पूरी तरह बंद कर दे, तो जीवन एवं स्वतंत्रता की हत्या की कीमत पर खड़ा हो रहा यह ‘नशा मुक्ति केंद्र रूपी आपराधिक उद्योग’ अपने आप मर जाएगा।
शराब सामाजिक बुराई, पर मौलिक अधिकार सर्वोपरि
डॉ. मल्ल ने अपने पत्र में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक व कानूनी तर्क भी दिया। उन्होंने कहा कि शराब बेशक एक मानसिक और सामाजिक बुराई है, लेकिन किसी भी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का हनन करके इस लत को नहीं छुड़ाया जा सकता। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कुछ आदिम एवं वन क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से निकाली गई शराब वहाँ के लोगों के पारंपरिक भोजन का एक हिस्सा होती है। अतः शराब छुड़ाने के नाम पर यातना स्थल बन चुके इन केंद्रों को तत्काल बंद किया जाना चाहिए।
गृह मंत्री से हस्तक्षेप और इन उच्चाधिकारियों को भेजी प्रतिलिपि:
डॉ. मल्ल ने देश के केंद्रीय गृह मंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। इसके साथ ही इस पत्र की प्रतिलिपि (रिमाइंडर) न्यायपालिका, कार्यपालिका और प्रशासन के इन शीर्ष अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी गई है:
न्यायपालिका: माननीय मुख्य न्यायाधीश (सुप्रीम कोर्ट, नई दिल्ली), माननीय मुख्य न्यायाधीश (इलाहाबाद हाई कोर्ट)।
संवैधानिक व शीर्ष पद: माननीय राष्ट्रपति महोदया, माननीय प्रधानमंत्री, माननीय राज्यपाल (उ.प्र.), माननीय मुख्यमंत्री (उ.प्र.)।
मानवाधिकार: अध्यक्ष (माननीय मानवाधिकार आयोग, उत्तर प्रदेश)।
प्रशासन व पुलिस: मुख्य सचिव (उ.प्र.), सचिव गृह (उ.प्र.), डीजीपी (उ.प्र.), श्रीमान आयुक्त (गोरखपुर), जिलाधिकारी (गोरखपुर), एडीजी, डीआईजी और एसएसपी (गोरखपुर)।
मुख्य मांग
पत्र के अंत में सुप्रीम कोर्ट और सरकार से अपील की गई है कि वे पूरे देश और प्रदेश में चल रहे ऐसे अवैध व क्रूर नशा मुक्ति केंद्रों के संचालन की सघन जांच के आदेश दें और नियमों का उल्लंघन कर लोगों को बंधक बनाने वाले केंद्रों को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश पारित करें।

