गन्ना किसानों को 998 करोड़ का भुगतान

गन्ना किसानों को 998 करोड़ का भुगतान

कुशीनगर(जगदीश सिंह)
पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिले कुशीनगर में गन्ना पेराई सत्र 2025-26 किसानों के लिए राहत भरा साबित हुआ है। इस सत्र में जिले के गन्ना किसानों को कुल 998 करोड़ 39 लाख रुपये का गन्ना मूल्य भुगतान किया गया है। यह जानकारी पिपराइच स्थित गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र के पूर्व सहायक निदेशक एवं गन्ना विकास सलाहकार ओमप्रकाश गुप्ता ने अध्ययन एवं सर्वेक्षण के आधार पर दी।
उन्होंने बताया कि जिले के 2 लाख 6378 किसानों ने चारों चीनी मिलों—रामकोला, ढाढा, खड्डा और सेवरही—को कुल 253.09 लाख क्विंटल गन्ने की आपूर्ति की। गन्ना फसल को उन्होंने किसानों के लिए वरदान बताते हुए इसे जिले की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया।
चीनी मिलों का प्रदर्शन:
खड्डा चीनी मिल ने 29.77 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर 2.61 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया। इस मिल पर 118.74 करोड़ रुपये देय थे, जिसमें से 115.78 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है, जबकि 2.96 करोड़ रुपये बकाया हैं।
सेवरही चीनी मिल ने 72.73 लाख क्विंटल गन्ना पेराई कर 287.03 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा। इसमें से 240.39 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है, जबकि 46.34 करोड़ रुपये अभी बकाया हैं। यह मिल जिले में सर्वाधिक बकाया वाली मिल रही, हालांकि इसकी चीनी परता 11.28 प्रतिशत के साथ सबसे अधिक रही।
ढाढा चीनी मिल ने 72.85 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर 284.20 करोड़ रुपये का शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया है, हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में करीब 14 लाख क्विंटल आपूर्ति में कमी दर्ज की गई।
रामकोला चीनी मिल ने 77.74 लाख क्विंटल गन्ना पेराई कर 308.42 करोड़ रुपये का पूरा भुगतान कर दिया है। इस मिल की चीनी परता 10.87 प्रतिशत रही।
किसानों की समस्याएं और सुझाव
सर्वेक्षण के दौरान किसानों ने बढ़ती लागत और मजदूरों की कमी को प्रमुख समस्या बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि गेहूं और धान के दाम हर वर्ष बढ़ते हैं, जबकि गन्ने के मूल्य में अनिश्चितता बनी रहती है।
इस पर ओमप्रकाश गुप्ता ने किसानों को सलाह दी कि वे पेड़ी गन्ना प्रबंधन पर विशेष ध्यान दें, सहफसली खेती अपनाएं और कृषि यंत्रों का अधिक उपयोग करें, जिससे लागत घटे और उत्पादन बढ़े। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के दौर में गन्ना फसल को अधिक सहनशील बताते हुए इसका रकबा कम न करने की अपील की।
उन्होंने अपने 40 वर्षों के अनुभव के आधार पर कहा, जहां गन्ना होगा, वहीं विकास होगा। गन्ना ही किसानों की समृद्धि का आधार है।
उधर, उप गन्ना आयुक्त देवरिया ए.पी. सिंह द्वारा गन्ना विकास एवं भुगतान की स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है।

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