“जब तक युद्ध बंद नहीं होगा, सत्याग्रह नहीं रुकेगा।”अब शांति की रोशनी जगाएंगे भिक्षु
इस दर्द को महसूस करते हुए, डॉ नंद रतन भंते के नेतृत्व में 7 अप्रैल को शाम 5 से 7 बजे तक बौद्ध भिक्षु “पीस कैंडल मार्च” निकालेंगे।
शायद इन जलती मोमबत्तियों की रोशनी, दुनिया के अंधेरे को कुछ कम कर सके…एक अकेला इंसान… और पूरी दुनिया के लिए लड़ाई
ना कोई सत्ता, ना कोई ताकत… सिर्फ एक जिद — युद्ध रुकना चाहिए… इंसानियत बचनी चाहिए…कुशीनगर, जहां भगवान बुद्ध ने अंतिम सांस ली… आज वहीं से एक इंसान दुनिया को जीवन देने की कोशिश कर रहा है।
धूप से झुलसा शरीर भले ही कमजोर हो गया हो… लेकिन उसके अंदर जलती शांति की लौ आज भी पूरी दुनिया के लिए उम्मीद बनी हुई है।(सच्ची रिपोर्ट न्यूज — जब खबर दिल से निकलती है, तो सीधे दिल तक पहुंचती है)
इस दर्द को महसूस करते हुए, डॉ नंद रतन भंते के नेतृत्व में 7 अप्रैल को शाम 5 से 7 बजे तक बौद्ध भिक्षु “पीस कैंडल मार्च” निकालेंगे।
शायद इन जलती मोमबत्तियों की रोशनी, दुनिया के अंधेरे को कुछ कम कर सके…एक अकेला इंसान… और पूरी दुनिया के लिए लड़ाई
ना कोई सत्ता, ना कोई ताकत… सिर्फ एक जिद — युद्ध रुकना चाहिए… इंसानियत बचनी चाहिए…कुशीनगर, जहां भगवान बुद्ध ने अंतिम सांस ली… आज वहीं से एक इंसान दुनिया को जीवन देने की कोशिश कर रहा है।
धूप से झुलसा शरीर भले ही कमजोर हो गया हो… लेकिन उसके अंदर जलती शांति की लौ आज भी पूरी दुनिया के लिए उम्मीद बनी हुई है।(सच्ची रिपोर्ट न्यूज — जब खबर दिल से निकलती है, तो सीधे दिल तक पहुंचती है)