हद हो गई निरंकुशता की!
कसया-पडरौना मार्ग पर छावनी से बड़ी नहर तक टूटी सड़क, दुर्घटनाएं आम
क्या जिम्मेदारों को नहीं दिख रही सड़क की बदहाली? एक लेयर सड़क मैटेरियल की दरकार
कुशीनगर। हद हो गई निरंकुशता की! कसया-पडरौना मार्ग पर छावनी से बड़ी नहर तक सड़क की हालत बद से बदतर होती जा रही है। सड़क जगह-जगह टूट चुकी है और गड्ढों के कारण राहगीरों तथा वाहन चालकों को आए दिन परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस मार्ग से प्रतिदिन गुजरने वाले हजारों लोगों की समस्या जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को आखिर क्यों नजर नहीं आ रही है?
क्या मंत्री, सांसद, विधायक और जिले के आला अधिकारियों को नहीं लगता कि इस मार्ग पर तत्काल कम से कम एक लेयर सड़क मैटेरियल डालकर सड़क को चलने योग्य बनाने की जरूरत है?
सड़क की स्थिति ऐसी है कि दोपहिया वाहन चालकों के लिए विशेष रूप से खतरा बना हुआ है। रात के समय गड्ढों और टूटी सड़क के कारण दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है। यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो किसी बड़े हादसे के बाद जिम्मेदार विभाग जागेगा या उससे पहले?
जनता का सवाल सीधा है—सड़क की मरम्मत की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर निरीक्षण क्यों नहीं कर रहे? जनप्रतिनिधि इस महत्वपूर्ण मार्ग की बदहाली को लेकर विभाग से जवाब क्यों नहीं मांग रहे?
जनता को आश्वासन नहीं, सड़क पर काम चाहिए। कम से कम तत्काल प्रभाव से क्षतिग्रस्त हिस्से पर सड़क निर्माण सामग्री की एक लेयर डालकर आवागमन सुरक्षित किया जाना चाहिए। इसके बाद स्थायी मरम्मत की प्रक्रिया पूरी की जाए।
सवाल सिर्फ सड़क का नहीं, लोगों की सुरक्षा का है।
आज सड़क टूटी है, कल कोई बड़ा हादसा हो सकता है। हादसा होने के बाद जिम्मेदारी तय करने से बेहतर है कि जिम्मेदार विभाग आज ही सड़क की सुध ले।
आखिर इस बदहाल सड़क के लिए जिम्मेदार कौन है?
