कुशीनगर में दमकल व्यवस्था पर सवाल
सिपाही और चालकों की कमी से जूझ रहा अग्निशमन विभाग, कई स्टेशन सीमित संसाधनों के भरोसे
हाटा फायर स्टेशन कर्मचारियों के अभाव में अब तक नहीं हुआ शुरू, कसया में छोटी फायर सर्विस भी स्टाफ की कमी से प्रभावित
कुशीनगर। जिले में आगजनी की घटनाओं से निपटने के लिए जिम्मेदार अग्निशमन विभाग की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जिले के कई फायर स्टेशनों पर स्वीकृत पदों के सापेक्ष सिपाहियों और वाहन चालकों की कमी बताई जा रही है। इससे दमकल वाहनों के संचालन से लेकर आपात स्थिति में तत्काल मौके पर पहुंचने की व्यवस्था पर दबाव पड़ने की आशंका है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार जिले में एक इंस्पेक्टर के स्तर पर जांच सहित अन्य जिम्मेदारियां संभालने के साथ सभी फायर स्टेशनों की कमियों पर प्रभावी निगरानी रखना चुनौतीपूर्ण है। सूत्रों का कहना है कि इंस्पेक्टर सुरेंद्र दोहरे के सामने जांच से जुड़ी जिम्मेदारियों के साथ विभागीय व्यवस्थाओं की निगरानी की भी जिम्मेदारी है।
जिला अग्निशमन अधिकारी के सामने भी स्टाफ की कमी चुनौती
जिले की अग्निशमन व्यवस्था की जिम्मेदारी जिला अग्निशमन अधिकारी सुपात्र शंखधर के पास है, जो सीओ रैंक के अधिकारी बताए जाते हैं। विभागीय स्तर पर कर्मचारियों और चालकों की कमी के चलते उनके सामने भी उपलब्ध संसाधनों में आपात सेवा को संचालित रखने की चुनौती है।
कर्मचारियों की कमी को जिला स्तर पर पूरी तरह दूर करना संभव नहीं होता, क्योंकि नई तैनाती और स्वीकृत पदों को भरने का निर्णय उच्च स्तर से जुड़ा होता है। ऐसे में जिला स्तर से रिक्त पदों और आवश्यक स्टाफ की मांग शासन को भेजना तथा उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन महत्वपूर्ण हो जाता है।
हाटा में फायर स्टेशन, लेकिन कर्मचारी और चालक की कमी
हाटा क्षेत्र में फायर स्टेशन की व्यवस्था को लेकर सबसे प्रमुख सवाल सामने आ रहा है। कर्मचारियों और वाहन चालक की पर्याप्त तैनाती नहीं होने के कारण फायर स्टेशन अब तक शुरू नहीं हो सका है।
क्षेत्र में आगजनी की स्थिति में तत्काल दमकल सुविधा उपलब्ध कराने के लिए स्टेशन का पूर्ण संचालन जरूरी है। ऐसे में कर्मचारियों की कमी के कारण स्टेशन का संचालन प्रभावित होना स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण विषय है।
कसया में छोटी फायर सर्विस सिपाहियों के भरोसे
कसया में छोटी फायर सर्विस गाड़ी भी कर्मचारियों की कमी से प्रभावित बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार छोटी दमकल गाड़ी सिपाहियों के भरोसे चल रही है।
आपातकालीन सेवा होने के कारण दमकल वाहन के संचालन के लिए प्रशिक्षित चालक की उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि किस स्टेशन पर कितने प्रशिक्षित चालक उपलब्ध हैं और आवश्यकता के मुकाबले कितने पद रिक्त हैं।
कप्तानगंज में 16 की जगह आठ सिपाही
कप्तानगंज फायर स्टेशन में 16 सिपाहियों की आवश्यकता के मुकाबले आठ सिपाहियों की तैनाती होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा यहां एक अतिरिक्त चालक की आवश्यकता भी बताई जा रही है।
कर्मचारियों की संख्या कम होने का सीधा असर एक साथ कई घटनाओं के दौरान उपलब्ध बल पर पड़ सकता है। ऐसे में स्वीकृत पदों और वर्तमान तैनाती की समीक्षा आवश्यक है।
तमकुहीराज में दो की जरूरत, एक चालक तैनात
तमकुहीराज फायर स्टेशन पर भी चालक की कमी बताई जा रही है। यहां दो चालकों की आवश्यकता के मुकाबले एक चालक की तैनाती होने की जानकारी है। आपातकालीन सेवा के लिए चालक की उपलब्धता लगातार बनी रहना जरूरी है।
जिला मुख्यालय पर छह टैंकर, बड़ी गाड़ियों के लिए चालक की कमी
जिला मुख्यालय पर छह टैंकर उपलब्ध होने की जानकारी है। वहीं बड़ी दमकल गाड़ियों के संचालन के लिए चार चालकों की आवश्यकता के मुकाबले एक चालक उपलब्ध होने की बात सामने आई है।
यदि यह स्थिति विभागीय अभिलेखों से सही पाई जाती है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आवश्यकता के समय सभी दमकल वाहनों का संचालन किस व्यवस्था के तहत किया जाएगा।
खड्डा की स्थिति अपेक्षाकृत ठीक
जिले के खड्डा क्षेत्र में फायर सर्विस की स्थिति अन्य स्थानों की तुलना में अपेक्षाकृत ठीक बताई जा रही है। हालांकि जिले की समग्र अग्निशमन व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए प्रत्येक स्टेशन पर पर्याप्त कर्मचारी और चालक उपलब्ध होना जरूरी है।
सिपाहियों से दमकल वाहन चलवाने का दावा
विभागीय सूत्रों का दावा है कि कर्मचारियों और चालकों की कमी के कारण कुछ स्थानों पर सिपाहियों से दमकल वाहन चलवाए जाने की स्थिति है। यदि ऐसा है तो विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित कर्मियों के पास निर्धारित प्रशिक्षण और वाहन संचालन की वैध पात्रता है या नहीं।
जांच के साथ कमियां दूर कराने की भी जरूरत
इंस्पेक्टर सुरेंद्र दोहरे की जिम्मेदारियों को लेकर भी विभागीय स्तर पर चर्चा है। सवाल यह है कि जिले में जांच संबंधी कार्यों के साथ-साथ फायर स्टेशनों में कर्मचारियों, चालकों और संसाधनों की कमी की नियमित समीक्षा कितनी प्रभावी ढंग से हो पा रही है।
वहीं जिला अग्निशमन अधिकारी सुपात्र शंखधर के सामने सीमित स्टाफ में व्यवस्था संचालित करने की चुनौती है। यदि रिक्तियां जिला स्तर से पूरी नहीं की जा सकतीं तो शासन स्तर पर अतिरिक्त कर्मचारियों और चालकों की मांग को प्रभावी ढंग से उठाना जरूरी होगा।
आग लगने के बाद नहीं, पहले मजबूत हो व्यवस्था
अग्निशमन सेवा सीधे नागरिकों की जान और संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ी आपातकालीन सेवा है। इसलिए आग लगने के बाद संसाधन जुटाने के बजाय पहले से पर्याप्त दमकल वाहन, प्रशिक्षित चालक और अग्निशमन कर्मियों की उपलब्धता जरूरी है।
कुशीनगर में सामने आई कर्मचारियों और चालकों की कमी की स्थिति की विभागीय स्तर पर समीक्षा कर स्वीकृत पद, वर्तमान तैनाती, रिक्त पद और उपलब्ध दमकल वाहनों की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक किए जाने की जरूरत है।
सच्ची रिपोर्ट की पड़ताल: यदि फायर स्टेशनों पर कर्मचारियों और चालकों की कमी के ये आंकड़े विभागीय रिकॉर्ड से पुष्ट होते हैं, तो शासन स्तर पर रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया तेज करना आवश्यक होगा। आखिर आग की घटना सूचना देकर नहीं आती ऐसे में दमकल विभाग को हर समय पूरी तैयारी में रहना ही नागरिक सुरक्षा की पहली शर्त है।
