गांव में रहकर शहरों जैसी सुविधा देना बड़ी बात, लौह कला के क्षेत्र में संत राधेश्याम जायसवाल की अलग पहचान

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गांव में रहकर शहरों जैसी सुविधा देना बड़ी बात, लौह कला के क्षेत्र में संत राधेश्याम जायसवाल की अलग पहचान

घर से लेकर बैंक और ऑफिस तक—खिड़की, दरवाजा, गेट, ग्रिल व रेलिंग का काम एक ही वर्कशॉप में, सस्ते दामों पर सुविधा उपलब्ध

सच्ची रिपोर्ट | कुशीनगर

कुशीनगर जिले के सांडी खुर्द निवासी संत राधेश्याम जायसवाल ने लौह कला के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। गांव में रहकर शहरों जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना बड़ी बात है। जानकीनगर स्थित उनकी वर्कशॉप में घर, दुकान, शोरूम, बैंक और ऑफिस सहित विभिन्न प्रतिष्ठानों में लगने वाले लोहे के खिड़की-दरवाजे, गेट, ग्रिल, रेलिंग आदि का निर्माण सरल तरीके से किया जाता है।

जरूरत के मुताबिक तैयार होते हैं लोहे के सामान

जानकीनगर स्थित इस वर्कशॉप में ग्राहकों की जरूरत के अनुसार लोहे से जुड़े विभिन्न कार्य किए जाते हैं। घर की सुरक्षा के लिए मजबूत गेट हो या दुकान और शोरूम की सुंदरता बढ़ाने वाली ग्रिल, बैंक व ऑफिस के लिए खिड़की-दरवाजे हों या सीढ़ियों की रेलिंग—लौह कला से जुड़े इन कार्यों को कारीगरी के साथ पूरा करने का प्रयास किया जाता है।

ग्रामीण क्षेत्र में ऐसी सुविधा उपलब्ध होने से लोगों को शहरों की ओर जाने की परेशानी कम हो सकती है। स्थानीय स्तर पर काम मिलने से समय और आने-जाने के खर्च में भी बचत की संभावना रहती है।

विवेकानंद और चंदन जायसवाल का योगदान

इस वर्कशॉप के कार्यों को आगे बढ़ाने में विवेकानंद जायसवाल और चंदन जायसवाल का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। लौह कला के क्षेत्र में इनके प्रयासों से वर्कशॉप को बेहतर बनाने और ग्राहकों को सुविधाएं उपलब्ध कराने में सहयोग मिल रहा है।

गांव की प्रतिभा और हुनर को मिल रहा मंच

संत राधेश्याम जायसवाल की वर्कशॉप यह संदेश देती है कि हुनर और मेहनत के दम पर गांव में रहकर भी आधुनिक जरूरतों को पूरा करने वाली सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। लौह कला के क्षेत्र में स्थानीय कारीगरों का योगदान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ रोजगार और स्वावलंबन की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

सच्ची रिपोर्ट
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