रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाकर नैनो तकनीक से सुरक्षित होगी मृदा, जल और पर्यावरण

नैनो उर्वरक से बदलेगी खेती की तस्वीर, लागत घटेगी—उपज बढ़ेगी

रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाकर नैनो तकनीक से सुरक्षित होगी मृदा, जल और पर्यावरण

इफको कार्यशाला में किसानों के हित में वैज्ञानिक खेती का संदेश, कृषि अधिकारियों को मिला प्रशिक्षण

पडरौना।
कृषि लागत में कमी और मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के उद्देश्य से सोमवार को पडरौना बीज भंडार स्थित सभागार में इफको के तत्वावधान में नैनो उर्वरकों के उपयोग एवं महत्व पर आधारित एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिला कृषि अधिकारी डॉ. मेनका रहीं, जबकि अध्यक्षता इफको गोरखपुर के वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक डॉ. विनोद कुमार सिंह ने की। कार्यक्रम का संचालन इफको क्षेत्र अधिकारी अनमोल मिश्रा ने किया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि किसान यदि नैनो उर्वरकों का प्रयोग करें तो खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। साथ ही यूरिया व डीएपी जैसे रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से जल, मृदा और पर्यावरण को होने वाले नुकसान से भी बचा जा सकता है।
इफको कुशीनगर के क्षेत्र अधिकारी अनमोल मिश्रा ने नैनो उर्वरकों की आवश्यकता, प्रयोग विधि एवं फसलों में होने वाले लाभों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों के प्रयोग से मृदा स्वास्थ्य में सुधार होता है तथा जल, पर्यावरण और मानव जीवन पर पड़ने वाले रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों से आसानी से बचा जा सकता है।
मुख्य अतिथि डॉ. मेनका ने कहा कि किसानों द्वारा लगातार बढ़ते रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से मृदा की उत्पादकता में गिरावट आ रही है। ऐसे में नैनो उर्वरक किसानों के लिए एक बेहतर, सुरक्षित और लाभकारी विकल्प सिद्ध हो सकते हैं।
इस अवसर पर भूमि संरक्षण अधिकारी सुदीप पटेल, अपर जिला कृषि अधिकारी संदीप यादव, लकी तिवारी, इफको के एसएफए अभिषेक दुबे, अंगद गिरी सहित कृषि विभाग एवं इफको के कई अधिकारी मौजूद रहे।

सच्ची रिपोर्ट
रिपोर्ट : के. एन. साहनी

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