
सड़क पर बेसुध पड़े व्यक्ति के लिए फरिश्ता बने कसया के ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अक्षय दीपक, दिखाई इंसानियत की मिसाल
गोला बाजार की मुख्य सड़क पर घंटों पड़ा रहा व्यक्ति, राहगीर गुजरते रहे लेकिन किसी ने नहीं की मदद
सरकारी वाहन से गुजर रहे आईएएस अक्षय दीपक की पड़ी नजर, अर्दली और गार्ड से सम्मानपूर्वक उठवाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया
कुशीनगर/कसया। प्रशासनिक जिम्मेदारी के साथ मानवीय संवेदना भी कितनी जरूरी है, इसकी एक खूबसूरत मिसाल कसया के ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं आईएएस अधिकारी जी. अक्षय दीपक ने पेश की। गोला बाजार की मुख्य सड़क पर एक व्यक्ति घंटों से पड़ा हुआ था। राहगीरों और वाहन चालकों का लगातार आना-जाना लगा रहा, लेकिन किसी ने उसे सड़क से उठाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की जहमत नहीं उठाई।
बताया जाता है कि व्यक्ति सड़क के बीचोंबीच पड़ा था। वह नशे में था या किसी अन्य वजह से बेसुध था, इसकी तत्काल जानकारी नहीं हो सकी। ऐसे में सड़क पर पड़े व्यक्ति के साथ किसी दुर्घटना की आशंका भी बनी हुई थी।
इसी दौरान ज्वाइंट मजिस्ट्रेट जी. अक्षय दीपक अपनी सरकारी गाड़ी से वहां से गुजर रहे थे। उनकी नजर सड़क पर पड़े व्यक्ति पर पड़ी तो उन्होंने तत्काल अपनी गाड़ी रुकवाई। इसके बाद अपने अर्दली और सुरक्षा गार्ड को निर्देश दिया कि व्यक्ति को सम्मानपूर्वक सड़क से उठाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाए।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के निर्देश पर अर्दली और गार्ड ने व्यक्ति को सड़क से हटाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इस छोटी-सी पहल ने यह संदेश दिया कि किसी जरूरतमंद की मदद के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि संवेदनशील सोच और मानवीय दृष्टिकोण की जरूरत होती है।
पद से नहीं, व्यवहार से बड़ी होती है इंसानियत
आज के दौर में अक्सर लोग किसी परेशानी में पड़े व्यक्ति को देखकर भी अनदेखा कर देते हैं। गोला बाजार की इस घटना में भी घंटों तक लोग आते-जाते रहे, लेकिन किसी ने पहल नहीं की। ऐसे में एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी का स्वयं रुककर मदद के लिए आगे आना सराहनीय है।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट जी. अक्षय दीपक की यह पहल बताती है कि प्रशासनिक अधिकारी की जिम्मेदारी केवल सरकारी बैठकों, निरीक्षण और कार्यालयों तक सीमित नहीं होती, बल्कि सड़क पर किसी असहाय व्यक्ति की मदद करना भी मानवीय कर्तव्य का हिस्सा है।
कसया में उनकी इस संवेदनशील पहल की चर्चा लोगों के बीच सराहना का विषय बन सकती है।
