जानकीनगर बाजार बना कीचड़ का चौराहा
क्रासर: “रोक दीजिए साहब… आ गया मेरा कीचड़ वाला चौराहा!”
रिपोर्ट: के.एन. साहनी
कुशीनगर। जानकीनगर बाजार में जलजमाव और कीचड़ की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। इस मुद्दे को लेकर पहले भी खबर प्रकाशित की जा चुकी है, लेकिन आज भी हालात नहीं बदले हैं। बारिश के बाद बाजार की सड़कें कीचड़ से लबालब भर जाती हैं, जिससे राहगीरों, दुकानदारों और खरीदारी करने आने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
हाल ही में इस समस्या का एक रोचक लेकिन गंभीर उदाहरण सामने आया। गोरखपुर से दो युवक बस द्वारा जानकीनगर आने के लिए निकले। दोनों बाहर प्रदेश के रहने वाले थे और उन्हें उतरने वाले स्थान का नाम याद नहीं था। बस में भीड़ के कारण वे बार-बार बाहर झांक रहे थे। यह देखकर कंडक्टर ने पूछा, “भाई साहब, आखिर उतरना कहाँ है?”
दोनों यात्रियों ने जवाब दिया, “हमें बस इतना पता है कि जिस चौराहे पर सबसे ज्यादा कीचड़ और जलजमाव होगा, वहीं बस रोक दीजिए।”
कंडक्टर मुस्कुराया और बोला, “रोक दीजिए साहब… आ गया आपका कीचड़ वाला चौराहा, जानकीनगर!” दोनों ने तुरंत कहा, “हाँ, यही उतरना है।”
यह घटना बताती है कि जिले के सबसे व्यस्त और भीड़भाड़ वाले चौराहों में शामिल जानकीनगर चौराहा आज विकास से अधिक कीचड़ और जलजमाव के कारण अपनी पहचान बना चुका है। बाजार में वाहनों के गुजरते ही कीचड़ का छींटा राहगीरों, दुकानदारों और ग्राहकों पर पड़ना आम बात हो गई है।
स्थानीय नागरिकों डॉ. सूर्यभान मिश्रा, बलराम सिंह, बृजेश सिंह, राजेश सिंह, ओमप्रकाश गुप्ता, प्रभु मद्धेशिया एवं चंदन मद्धेशिया,अच्छेलाल मद्धेशिया, पवन त्रिपाठी , दिनेश सिंह, आदि ने प्रशासन से तत्काल जलनिकासी की समुचित व्यवस्था कराने और जानकीनगर चौराहे को कीचड़ मुक्त चौराहा बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि यह चौराहा जिले का अत्यंत व्यस्त बाजार है, जहां प्रतिदिन हजारों लोगों और वाहनों का आवागमन होता है। ऐसे में जलजमाव और कीचड़ की समस्या का शीघ्र समाधान कराया जाना जनहित में अत्यंत आवश्यक है।




