पीड़ितों के मददगार SHO वेदप्रकाश शर्मा, सेवा भाव को देते हैं प्राथमिकता

अपराधियों से किसी तरह का जुड़ाव नहीं, पीड़ितों को न्याय दिलाना और जरूरतमंदों की मदद करना ही पुलिस सेवा का मूल उद्देश्य
चौरी चौरा, गोरखपुर।
पुलिस की वर्दी केवल अधिकार का प्रतीक नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा, सेवा और विश्वास की जिम्मेदारी भी है। थाना चौरी चौरा के थानाध्यक्ष श्री वेदप्रकाश शर्मा को लेकर चर्चा का प्रमुख पहलू पीड़ितों की सहायता, आम नागरिकों के प्रति संवेदनशीलता और कानून के दायरे में रहकर कर्तव्य निभाने की अपेक्षा है।
पुलिस अधिकारी की असली पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि संकट में पड़े व्यक्ति की मदद करने, पीड़ित की बात सुनने और न्याय की उम्मीद लेकर थाने पहुंचने वाले लोगों के प्रति उसके व्यवहार से बनती है। थानाध्यक्ष वेदप्रकाश शर्मा की कार्यशैली को भी इसी कसौटी पर देखा जाना चाहिए। आम जनता की अपेक्षा रहती है कि थाने में आने वाले प्रत्येक फरियादी को सम्मान मिले और उसकी शिकायत पर निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई हो।
पीड़ितों की मदद ही प्राथमिकता
पुलिस का मूल दायित्व अपराध पर नियंत्रण, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया में प्रभावी भूमिका निभाना है। जरूरतमंद व्यक्ति को सहायता देना, उसकी समस्या को गंभीरता से सुनना और नियमानुसार कार्रवाई करना जनहितकारी पुलिसिंग की पहचान है।
थानाध्यक्ष वेदप्रकाश शर्मा को लेकर यह संदेश सामने आता है कि पुलिस की ड्यूटी केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें सेवा भाव और लोगों की मदद करने की भावना भी सर्वोपरि रहनी चाहिए। अपराध की दुनिया से दूरी रखते हुए कानून के प्रति प्रतिबद्धता और पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता ही पुलिस की साख को मजबूत करती है।
वर्दी में अधिकार के साथ सेवा का दायित्व
जनता पुलिस से अपेक्षा करती है कि अपराध करने वाले व्यक्ति के साथ कानून के अनुसार सख्ती बरती जाए और पीड़ित को न्याय पाने में मदद मिले। पुलिस और आम नागरिकों के बीच विश्वास तभी मजबूत होता है, जब कार्रवाई निष्पक्ष हो और किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव न किया जाए।
थाना चौरी चौरा में थानाध्यक्ष की भूमिका भी इसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से जुड़ी है। सेवा भाव, कर्तव्यनिष्ठा और जनसहयोग की भावना पुलिस व्यवस्था को जनता के और करीब लाती है।
मेरा मानना है पुलिस की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई करना नहीं, बल्कि समाज में सुरक्षा का विश्वास कायम करना और पीड़ित को यह भरोसा दिलाना है कि उसकी बात सुनी जाएगी। यही जनसेवा की भावना पुलिस विभाग की प्रतिष्ठा को मजबूत बनाती है।
रिपोर्ट: के.एन. साहनी
