पूर्वांचल गांधी डॉ. संपूर्णानंद मल्ल जेल से रिहा, रिहाई में देरी पर उठाए गंभीर सवाल,,
गोरखपुर। पूर्वांचल गांधी के नाम से विख्यात डॉ. संपूर्णानंद मल्ल सोमवार को गोरखपुर जिला जेल से रिहा हो गए। शांति भंग के आरोप में निरुद्ध किए गए डॉ. मल्ल पिछले पांच दिनों से जेल में बंद थे। उनकी रिहाई के बाद समर्थकों में उत्साह का माहौल देखने को मिला और जेल गेट पर उनका फूल-मालाओं से जोरदार स्वागत किया गया।
जानकारी के अनुसार, डॉ. मल्ल की रिहाई 12 जून 2026 को होनी थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें शनिवार और रविवार को भी जेल में रखा गया। इसी को लेकर उन्होंने अपनी रिहाई में हुई देरी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि रिहाई संबंधी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी थीं तो उन्हें दो अतिरिक्त दिनों तक जेल में रखने का क्या औचित्य था। इस मामले को लेकर अब विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है।
सोमवार शाम करीब चार बजे जैसे ही डॉ. मल्ल जेल के मुख्य द्वार से बाहर निकले, पहले से मौजूद समर्थकों और शुभचिंतकों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। समर्थकों ने उन्हें फूल-मालाएं पहनाईं और उनके समर्थन में नारे भी लगाए। कई लोगों ने इसे जनहित की आवाज को दबाने का प्रयास बताया, जबकि प्रशासन की ओर से अभी तक इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
रिहाई के बाद मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में डॉ. मल्ल ने संकेत दिए कि वह पूरे घटनाक्रम पर जल्द ही विस्तार से अपनी बात रखेंगे। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों के अधिकारों और न्यायिक प्रक्रियाओं का सम्मान होना चाहिए तथा उनकी रिहाई में हुई देरी की परिस्थितियों की जांच होनी चाहिए।
डॉ. संपूर्णानंद मल्ल लंबे समय से सामाजिक सरोकारों और जनहित के मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि उन्होंने हमेशा जनता की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है। यही कारण है कि उनकी रिहाई के समय बड़ी संख्या में लोग जेल गेट पर मौजूद रहे।
फिलहाल पूरे मामले पर सबकी निगाहें डॉ. मल्ल की आगामी प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वह अपनी गिरफ्तारी और रिहाई में हुई कथित देरी को लेकर क्या तथ्य सामने रखते हैं और प्रशासन इस संबंध में क्या स्पष्टीकरण देता है। यह मामला आने वाले दिनों में चर्चा का विषय बना रह सकता है।