रामबाबू सच्ची रिपोर्ट चौरी चौरा गोरखपुर
चौरीचौरा (गोरखपुर)। नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन ज्योति प्रकाश गुप्ता ने एक प्रेसवार्ता के दौरान रेलवे ओवरब्रिज को लेकर चल रही राजनीतिक बयानबाजी पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 147-बी रेलवे ओवरब्रिज को लेकर कुछ लोगों द्वारा सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए जनता के बीच केवल भ्रम फैलाया जा रहा है।
शुरू से ही ‘वाई’ मॉडल था और ‘वाई’ मॉडल ही रहेगा
पूर्व चेयरमैन ने तथ्यों को सामने रखते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जनता की बेहद खास मांग पर स्वीकृत किया गया यह ओवरब्रिज शुरू से ही ‘वाई’ (Y) मॉडल का था और आज भी उसी स्वरूप में प्रस्तावित है। इसमें किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। ‘एल’ (L) मॉडल की बात पूरी तरह भ्रामक और राजनीतिक रूप से प्रेरित है।
सांसद के प्रयासों से स्वीकृत हुआ ₹59 करोड़ का बजट
परियोजना की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया:
तत्कालीन एवं वर्तमान सांसद कमलेश पासवान के विशेष प्रयासों से इस ‘वाई’ मॉडल ओवरब्रिज की योजना को मंजूरी मिली थी।
इसके निर्माण के लिए शुरुआत में करीब 59 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ था।
जनवरी 2022 में इसका भव्य भूमि पूजन भी संपन्न किया गया था।
क्यों हुई कार्य में देरी और लागत में वृद्धि?
ज्योति प्रकाश गुप्ता ने काम में आए व्यवधान और संशोधित डिजाइन के कारणों को स्पष्ट करते हुए कहा:
शुरुआती कारण: शुरुआती चरण में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता और फिर भारी बारिश के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ।
संशोधित डिजाइन: बाद में सड़क चौड़ीकरण और डिजाइन में तकनीकी बदलाव के चलते परियोजना की लागत बढ़ गई।
हैंगिंग ओवरब्रिज: संशोधित डिजाइन में हैंगिंग ओवरब्रिज का प्रस्ताव शामिल होने से बजट में बढ़ोतरी हुई। इसी वजह से पहले एक दिशा का निर्माण शुरू किया गया और ‘वाई’ मॉडल के शेष हिस्से के लिए अतिरिक्त बजट स्वीकृत कराने की प्रक्रिया तय की गई।
विरोधियों के आरोपों पर पलटवार और अतिक्रमण पर सफाई
उन्होंने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ विरोधी तत्वों और नेताओं ने जानबूझकर यह दुष्प्रचार किया कि ओवरब्रिज केवल शहीद स्मारक की ओर बनाया जा रहा है, जो कि पूरी तरह निराधार है।
रेलवे ढाला से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक के क्षेत्र में अतिक्रमण के मुद्दे पर उन्होंने साफ किया कि यह पूरा क्षेत्र अतिक्रमण जोन में आता है। जहां तक उनके निजी आवास का सवाल है, उनका मकान वर्षों पहले ही सरकारी भूमि छोड़कर, पीछे हटकर बनाया गया था।
“मैंने 10 वर्षों तक नगर की जनता की निस्वार्थ सेवा की है और आज भी क्षेत्र के लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए हमेशा तत्पर रहता हूँ। 147-बी ओवरब्रिज पहले भी वाई मॉडल था, आज भी वाई मॉडल है और आगे भी वाई मॉडल ही रहेगा।”
— ज्योति प्रकाश गुप्ता, पूर्व चेयरमैन
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