हरदोई में अशोक सम्राट की प्रतिमा विस्थापन पर विवाद, डीएम के बयान पर डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने जताई आपत्ति

हरदोई में अशोक सम्राट की प्रतिमा विस्थापन पर विवाद, डीएम के बयान पर डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने जताई आपत्ति

हरदोई में अशोक सम्राट की प्रतिमा विस्थापन पर विवाद, डीएम के बयान पर डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने जताई आपत्ति
गोरखपुर/हरदोई, 29 मई 2026।
हरदोई में अशोक सम्राट की प्रतिमा को हटाए जाने और विस्थापित किए जाने के मुद्दे पर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस बीच हरदोई के जिलाधिकारी द्वारा जारी बयान में कहा गया कि “अशोक की प्रतिमा हटाई नहीं गई है”, बल्कि केवल विस्थापित की गई है तथा सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने से बचने की अपील की गई है।
डीएम के इस बयान पर पूर्वांचल गांधी के नाम से चर्चित डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए जिलाधिकारी हरदोई को पत्र लिखा है। उन्होंने 30 मई को दोपहर 1 बजे डीएम चौराहे पर प्रस्तावित अपना सत्याग्रह फिलहाल स्थगित करने की घोषणा की है, लेकिन साथ ही प्रशासन से अशोक स्तंभ को उसके मूल स्थान पर पुनः स्थापित करने की मांग भी दोहराई है।
गोरखपुर के सत्यपथ गोविंद नगरी, थाना शाहपुर से जारी अपने पत्र में डॉ. मल्ल ने कहा कि “अशोक स्तंभ हटाया नहीं गया, केवल विस्थापित किया गया है” वाला बयान गंभीर और भ्रामक है। उन्होंने कहा कि किसी राष्ट्रीय प्रतीक का विस्थापन भी उतना ही आपत्तिजनक है जितना उसे हटाना।
डॉ. मल्ल ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि मीडिया में ऐसी चर्चाएं चल रही हैं कि अशोक स्तंभ के स्थान पर महाराणा प्रताप की प्रतिमा लगाए जाने की तैयारी है। उन्होंने इसे राष्ट्रविरोधी और नफरत फैलाने वाली सोच करार दिया।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि अशोक स्तंभ को उसके पूर्व स्थान पर कम से कम 11 फीट ऊंचे चबूतरे या प्लेटफार्म पर पुनः स्थापित किया जाए, ताकि उन्हें सत्याग्रह करने के लिए विवश न होना पड़े।
पत्र में डॉ. मल्ल ने सवाल उठाया कि आखिर सौंदर्यीकरण के नाम पर अशोक स्तंभ के विस्थापन की अनुमति क्यों दी गई। उन्होंने कहा कि सम्राट अशोक की धरोहर ढाई हजार वर्षों बाद भी भारतीय गौरव और स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है।
उन्होंने कहा,
“अशोक स्तंभ कोई चिन्ह मात्र नहीं, इसको भारत कहते हैं। अशोक का चित्र भारत का गौरव है।”
उन्होंने अपने पत्र में सारनाथ के लायन पिलर का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि इसी प्रकार सौंदर्यीकरण के नाम पर ऐतिहासिक प्रतीकों को हटाने की परंपरा शुरू हुई तो भविष्य में कोई भी राष्ट्रीय धरोहर सुरक्षित नहीं रहेगी।
डॉ. मल्ल ने कहा कि अशोक स्तंभ सदैव किसी स्थान के केंद्रीय और सर्वोच्च हिस्से में स्थापित किया जाता है तथा यह भारत की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक है।
इस पत्र की प्रतिलिपि उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश, इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति, गृह मंत्री, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी, आयुक्त, डीएम व एसएसपी गोरखपुर तथा पुलिस अधीक्षक हरदोई को भी भेजी है।

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