डुमरिया मठ के उत्तराधिकारी महंत रूद्रानंद गिरि के अनुसार, उनके पूर्वज गुरु की समाधि स्थल पर लंबे समय से पीपल और बरगद के पुराने वृक्ष मौजूद हैं। मठ और श्रद्धालुओं के लिए इन वृक्षों का विशेष धार्मिक महत्व है। सनातन परंपरा में पीपल और बरगद को आस्था, श्रद्धा और धार्मिक विश्वास का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में मठ पक्ष ने इन पेड़ों को कथित रूप से मशीनों से नुकसान पहुंचाने के प्रयास पर गहरी आपत्ति जताई है।
बताया गया कि सूचना मिलने के बाद पुलिस रात में मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। इसके बाद गुरुवार को मठ पक्ष ने तरयासुजान थाने में लिखित तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि भूमि विवाद का फैसला न्यायालय के माध्यम से होना चाहिए, लेकिन किसी भी पक्ष को कानून अपने हाथ में लेकर धार्मिक स्थल अथवा आस्था से जुड़े प्रतीकों को नुकसान पहुंचाने का अधिकार नहीं है।

