स्वर्ण युग का दावा या विषमता की गहरी खाई? डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने सरकार को घेरा
लखनऊ/कुशीनगर: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में जारी ‘मिशन शक्ति’ और ‘स्वर्ण युग’ के विज्ञापनों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए डॉ. संपूर्णानंद मल्ल पूर्वांचल गाँधी ने सरकार के दावों को धरातल से परे बताया है। एक खुले पत्र के माध्यम से उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए राज्य की वर्तमान स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
विज्ञापनों की चमक बनाम धरातल का अंधेरा
डॉ. मल्ल ने कहा कि जहाँ अखबारों के फ्रंट पेज पर ‘नारी सुरक्षा’ और ‘समृद्धि’ के बड़े-बड़े विज्ञापन छप रहे हैं, वहीं असलियत में प्रदेश “विनाश के बुलडोजर युग” से गुजर रहा है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पिछले नौ वर्षों में:
- 16 करोड़ लोग कंगाली की ओर धकेले गए हैं।
- 3 करोड़ बच्चे कुपोषण का शिकार हैं।
- 27,000 सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए हैं और 4 करोड़ युवा बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं।
शिक्षा और चिकित्सा के निजीकरण पर प्रहार
लेख में शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की जर्जर स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा गया है कि ‘राइट टू एजुकेशन एक्ट’ को कुचल दिया गया है। डॉ. मल्ल के अनुसार, “प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा और चिकित्सा का निजीकरण होने से गरीब वर्ग इन बुनियादी सुविधाओं से पूरी तरह वंचित हो गया है। नए खुले मेडिकल कॉलेजों में न दवाइयां हैं और न पर्याप्त डॉक्टर।”
चयनात्मक न्याय और ‘माफिया’ की परिभाषा
सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति पर सवाल उठाते हुए डॉ. मल्ल ने आरोप लगाया कि माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई में जातिगत भेदभाव बरता जा रहा है। उन्होंने कहा कि “मुसलमान, अहीर, ब्राह्मण और ठाकुर जातियों के कई माफिया आज भी अपना दबदबा बनाए हुए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि शासन के लिए माफिया की परिभाषा जाति के आधार पर बदल जाती है।”
विकास का मॉडल: किसके लिए?
एक्सप्रेसवे और इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स के निर्माण को उन्होंने “मुट्ठी भर पूंजीपतियों का विकास” करार दिया। उनके अनुसार, इन परियोजनाओं का प्रदेश की 18 करोड़ गरीब जनता से कोई सीधा सरोकार नहीं है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि ऊर्जा का बड़ा हिस्सा “अंधविश्वास, पाखंड और मंदिर आधारित राष्ट्रवाद” को बढ़ावा देने में खर्च किया जा रहा है, जबकि मानवीय विकास की अनदेखी की गई।
असली सुधार के लिए सुझाव
डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे वास्तव में ‘स्वर्ण युग’ लाना चाहते हैं, तो:
- अमीर-गरीब सबके लिए समान और निशुल्क शिक्षा व चिकित्सा सुनिश्चित करें।
- शराब का उत्पादन और बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित करें।
- धार्मिक स्थलों के निर्माण में सरकारी मशीनरी और संसाधनों का दुरुपयोग बंद करें।
निष्कर्ष: डॉ. मल्ल ने अंत में चेतावनी भरे लहजे में कहा कि आगामी चुनावों में केवल ढांचागत निर्माण (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के नाम पर वोट नहीं मांगा जा सकता। उन्होंने सवाल किया कि “मायावती, मुलायम और अखिलेश की सत्ता से यह सरकार किस प्रकार भिन्न है, जब तंत्र केवल थोड़े से रसूखदार लोगों के कब्जे में है और पुलिस उन्हें संरक्षण दे रही है?”
रिपोर्ट: के.एन. साहनी