15 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म व पॉक्सो मामले में 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा, ₹1.10 लाख का अर्थदंड

सच्ची रिपोर्ट | न्यायालय से बड़ी खबर
15 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म व पॉक्सो मामले में 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा, ₹1.10 लाख का अर्थदंड
विशेष पॉक्सो न्यायालय कुशीनगर का फैसला, दोषी को फैसले के बाद भेजा गया जेल
पडरौना/कुशीनगर, 29 जुलाई। जनपद कुशीनगर के थाना नेबुआ नौरंगिया में दर्ज मु0अ0सं0-08/2025 के बहुचर्चित दुष्कर्म एवं पॉक्सो एक्ट के मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने बुधवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अभियुक्त विजय महदेशिया को दोषी करार दिया। न्यायालय ने अभियुक्त को धारा 5/6 पॉक्सो एक्ट में 20 वर्ष के कठोर कारावास एवं ₹1,00,000 के अर्थदंड तथा धारा 351(3) भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत 2 वर्ष के साधारण कारावास एवं ₹10,000 के अर्थदंड से दंडित किया है।
न्यायालय के आदेश के अनुसार, अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में अभियुक्त को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। साथ ही, कुल अर्थदंड में से ₹55,000 की राशि पीड़िता अथवा उसके विधिक प्रतिनिधि को पुनर्वास हेतु प्रदान किए जाने का आदेश दिया गया है।
यह था मामला
अभियोजन के अनुसार, पीड़िता घटना के समय लगभग 15 वर्ष की नाबालिग थी। आरोप है कि अभियुक्त ने उसे डरा-धमकाकर उसके साथ दुष्कर्म किया तथा किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। भय और लोकलाज के कारण घटना तत्काल सामने नहीं आ सकी। बाद में पीड़िता गर्भवती हुई और उसने एक बच्चे को जन्म दिया, जिसके बाद परिजनों की तहरीर पर 03 जनवरी 2025 को थाना नेबुआ नौरंगिया में मुकदमा दर्ज किया गया।
विवेचना के उपरांत पुलिस ने धारा 64, 351(3) बीएनएस एवं 5/6 पॉक्सो एक्ट के तहत आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पीड़िता, उसके परिजनों, चिकित्सीय साक्ष्यों एवं अन्य अभिलेखीय साक्ष्यों का परीक्षण किया। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने अभियोजन का मामला संदेह से परे सिद्ध मानते हुए अभियुक्त को दोषसिद्ध किया।
अभियोजन की प्रभावी पैरवी
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष शासकीय अधिवक्ता (पॉक्सो एक्ट) फूलवदन एवं अजय कुमार गुप्त ने प्रभावी पैरवी की। अभियुक्त सुनवाई के दौरान जमानत पर था, लेकिन 29 जुलाई 2026 को फैसला सुनाए जाने के बाद न्यायालय के आदेश पर उसे तत्काल न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया गया।
न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि दोषसिद्ध अभियुक्त को निर्णय के विरुद्ध 30 दिनों के भीतर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार प्राप्त है।

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