मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा पर करोड़ों खर्च, मरीज सुविधाएं बदहाल

मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा पर करोड़ों खर्च, मरीज सुविधाएं बदहाल


रिपोर्ट: के एन साहनी | सच्ची रिपोर्ट


कुशीनगर। जिला मुख्यालय रविंद्रनगर धूस स्थित स्वशासी मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सरकार द्वारा पूर्व सैनिकों सहित बड़ी संख्या में सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। इस व्यवस्था पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति अब भी संतोषजनक नहीं है।
अस्पताल परिसर में प्रवेश से लेकर विभिन्न विभागों तक सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी आसानी से देखी जा सकती है। लेकिन मरीजों का कहना है कि उन्हें विभागों की जानकारी देने, गंभीर मरीजों को उचित स्थान तक पहुंचाने, बुजुर्गों और दिव्यांगों की सहायता करने अथवा भटक रहे मरीजों का मार्गदर्शन करने की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं दिखाई देती।
मरीजों का आरोप है कि सुरक्षा व्यवस्था पर भारी खर्च के बावजूद अस्पताल में “पेशेंट हेल्प सिस्टम” लगभग कागजों तक सीमित नजर आता है। कई बार दूर-दराज से आए मरीज घंटों अस्पताल परिसर में विभाग खोजते रहते हैं, जबकि उनके मार्गदर्शन के लिए कोई समुचित व्यवस्था नहीं मिलती।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज का उद्देश्य केवल भवन निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं होना चाहिए। स्वास्थ्य संस्थान की सफलता का पैमाना मरीजों को मिलने वाली सुविधा, उपचार की गुणवत्ता और मानवीय व्यवहार होना चाहिए।
जनता का सवाल है कि जब सरकार सुरक्षा व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च कर सकती है, तो मरीजों के लिए हेल्प डेस्क, व्हीलचेयर सहायता, सूचना केंद्र, मरीज मार्गदर्शन टीम और बेहतर उपचार व्यवस्था को और प्रभावी क्यों नहीं बनाया जा रहा है?
मेडिकल कॉलेज प्रशासन को चाहिए कि वह सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ मरीजों की सुविधा और उपचार व्यवस्था को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दे, ताकि मेडिकल कॉलेज का वास्तविक लाभ आम जनता तक पहुंच सके।

“क्या मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा व्यवस्था ही प्राथमिकता है, या मरीजों की सुविधा और इलाज भी उतना ही महत्वपूर्ण है?”

Related Post

Leave a Comment