निष्ठा और सेवा का संकल्प:अधिवक्ता समीर अहमद

सच्ची रिपोर्ट -कुशीनगर

निष्ठा और सेवा का संकल्प

जनपद कुशीनगर के कप्तानगंज निवासी युवा अधिवक्ता समीर अहमद आज क्षेत्र के जरूरतमंदों के लिए न्याय की उम्मीद बनकर उभर रहे हैं। वर्ष 2021 में विधि (एलएलबी) की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने वर्ष 2022 से न्यायालय में नियमित रूप से अभ्यास (प्रैक्टिस) शुरू किया। समीर के लिए वकालत महज एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के शोषित, पीड़ित और जरूरतमंद लोगों को उनका हक और सच्चा न्याय दिलाने का एक पवित्र माध्यम है।

थाना और तहसील स्तर की कमियों से बढ़ता है मुकदमों का बोझ

अधिवक्ता समीर अहमद का मानना है कि वर्तमान प्रशासनिक और कानूनी व्यवस्था में कुछ ऐसी बुनियादी खामियां हैं, जिनके कारण आम जनता को समय पर न्याय नहीं मिल पाता। उन्होंने बेबाकी से कहा:

जिन छोटे-मोटे मामलों का निस्तारण थाना, तहसील और ब्लॉक स्तर पर ही आपसी सूझबूझ या निष्पक्षता से हो जाना चाहिए, वे मामले भी प्रशासनिक उदासीनता के कारण न्यायालय तक पहुंच जाते हैं। इससे न केवल न्यायपालिका पर मुकदमों का अनावश्यक बोझ बढ़ता है, बल्कि गंभीर व संवेदनशील मामलों की सुनवाई में भी देरी होती है।”

सिस्टम की जटिलताओं के बीच अडिग है हौसला

उन्होंने दर्द साझा करते हुए कहा कि उन्होंने समाज के गरीब और असहाय तबके की मजबूत आवाज बनने का संकल्प लिया था, लेकिन सिस्टम की जटिलताओं, कागजी दांव-पेंच और कानूनी प्रक्रिया की धीमी गति के कारण कभी-कभी उनका यह सपना पूरी तरह साकार नहीं हो पाता। इसके बावजूद, वे बिना थके, पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ पीड़ितों के हित में लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

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समय पर मिले न्याय ही वास्तविक न्याय

अपने वक्तव्य के अंत में समीर अहमद ने एक बेहद गंभीर और विचारणीय बात कही:
“न्याय तभी सार्थक और प्रासंगिक है जब वह पीड़ित को समय रहते मिले। यदि किसी को न्याय पाने में ही वर्षों लग जाएं, तो उस न्याय का महत्व पीड़ित व्यक्ति के जीवन में लगभग समाप्त हो जाता है।”

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