ऐतिहासिक फैसला: मासूम से दरिंदगी के दोषी को ‘फांसी’ की सजा

कुशीनगर पॉक्सो कोर्ट ने सुनाया मौत का फरमान; दोषी पर 3.25 लाख का अर्थदंड भी लगा

पडरौना (कुशीनगर)।

जनपद के विशेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट) ने एक मासूम के साथ हुई हैवानियत के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो), दिनेश कुमार-II ने जटहां बाजार क्षेत्र के निवासी अभियुक्त पिंटू उर्फ कोयल को जघन्य अपराध का दोषी पाते हुए ‘मृत्युदंड’ (Capital Punishment) की सजा सुनाई है।

न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में आदेश दिया कि “दोषी को गले में फांसी का फंदा लगाकर तब तक लटकाया जाए, जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए।”

मामले की पृष्ठभूमि और कानूनी धाराएं

यह मामला थाना जटहां बाजार का है (मु०अ०सं० 20/2026), जिसमें पुलिस ने प्रभावी पैरवी कर साक्ष्य प्रस्तुत किए। अभियुक्त पिंटू उर्फ कोयल (उम्र 22 वर्ष), निवासी हिरनही बिन टोली पर मासूम के साथ कुकर्म और उसकी हत्या के गंभीर आरोप थे। कोर्ट ने उसे भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं में दोषी पाया:

  • फांसी की सजा (धारा 5J(iv), 5M/6 पॉक्सो एक्ट): लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के तहत मृत्युदंड और 2 लाख रुपये जुर्माना।
  • हत्या (धारा 103(1) BNS): इस धारा में भी दोषी को दंडित किया गया और 1 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
  • साक्ष्य मिटाना (धारा 238A BNS): साक्ष्य छिपाने के जुर्म में 4 वर्ष का सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माना।

पीड़ित परिवार को मिलेगी आर्थिक मदद

न्यायालय ने मानवीय संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए आदेश दिया कि अभियुक्त पर लगाए गए कुल 3 लाख 25 हजार रुपये के अर्थदंड की शत-प्रतिशत राशि पीड़ित/मृतक के नैसर्गिक संरक्षक (वादी मुकदमा इन्दू देवी) को पुनर्वास हेतु प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कुशीनगर को भी क्षतिपूर्ति की कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया है।

न्याय की जीत, समाज को संदेश

बुधवार को सुनाए गए इस फैसले से न्यायालय परिसर में ‘न्याय की जीत’ की चर्चा रही। विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कठोर फैसलों से समाज में अपराधियों के भीतर कानून का खौफ पैदा होगा और मासूमों के प्रति होने वाले अपराधों पर लगाम लगेगी। फिलहाल, दोषी को देवरिया जिला जेल में कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है और पत्रावली उच्च न्यायालय इलाहाबाद को पुष्टि हेतु भेजी जा रही है।

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